डॉ. प्रीति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, चित्रकला विभाग, हर्ष विद्या मंदिर (पी०जी०), कॉलेज रायसी हरिद्वार, चित्रकार, लेखिका, फोटोग्राफर एवं प्राध्यापिका शिक्षाः एम. ए. चित्रकला, हिन्दी, संस्कृत, शिक्षाशास्त्र, एम. एड.. पीएच० डी०, पी०डी०एफ. (चित्रकला) चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ शोधः राजस्थानी लोक कथाओं का चित्रण-एक अध्ययन 2003 फैलोशिपः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली मई, 2016 शीर्षकः लोकवार्ता अभिव्यक्ति में राजस्थानी धार्मिक लोकचित्रकला परम्परा-एक अध्ययन शिक्षण अनुभवः 15 वर्षों से अधिक यू. जी. एवं पी. जी. कक्षाओं का शिक्षण अनुभव शोध परियोजनाः उत्तराखंड की जनजातियों का सांस्कृतिक अधययन अधययन (गढ़वाल मंडल के संदर्भ मे) 2023 संगोष्ठीः विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में 30 से अधिक शोध-पत्रों का वाचन एवं सहभागिता की व्याख्यानः अनेक अतिथि व्याख्यान दिये एवं आयोजित किये, राष्ट्रीय संगोष्ठियो का आयोजन 2022, 2024 एवं राज्य सिम्पोजियम आयोजित किये प्रकाशन-विभिन्न राष्ट्रीय एवं अतरराष्ट्रीय यू० जी० सी० केयर लिस्टेड शोध पत्रिकाओं में 12 से अधिक शोध-पत्रों का प्रकाशन पुस्तकः बदलते परिवेश में ललित कलाओं की भूमिका, राजस्थानी लोक कथाओं का चित्रण, चित्रकला के तत्व, तकनीक एवं लोककला प्रदर्शनीः विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में प्रतिभागिता एवं आयोजित की। उच्च कोटि प्रदर्शन हेतु पुरुस्कृत भी प्राप्त किया कार्यशालाः अनेक कार्यशालाओं में प्रतिभागिता एवं सहयोग
प्रस्तुत पुस्तक भारतीय आधुनिक कला एवं कलाकार में विषय तथा पाठ्यक्रम से सम्बन्धित उपयुक्त विषय सामग्री प्रस्तुत की गई है, जिसके अन्तर्गत विशेष रूप से भारत में आधुनिक चित्रकला व चित्रकारों के जीवन व शैली पर विस्तृत विवरण है। जिसे आठ बिन्दुओं में विभक्त करके सरलता से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कलाकारों का वर्णन निम्न बिंदुओं के आधार पर किया गया है-सर्वप्रथम प्रस्तावना, उनकी जीवन शिक्षा और कार्य क्षेत्र, चित्रित चित्र, चित्रण-शैली, अन्य प्रतिमा, प्रदर्शनियाँ, पुरस्कार एवं सम्मान व निष्कर्ष के माध्यम से व्यक्त किया गया है। इसके पश्चात् इस पुस्तक में प्रत्येक वर्णित कलाकार का सार तथा उससे सम्बन्धित प्रश्न भी दिए हैं। प्रस्तुत पुस्तक में आधुनिक कला विषय को भी छात्रों के लिए सरल, स्पष्ट शब्दों, भाषा और शैली के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे उन्हें दर्शन के प्रति रुचि बनी रहे, क्योंकि प्रायः क्लिष्ट भाषा का प्रयोग होने से भाव भी उलझकर रह जाते हैं। इस पुस्तक में पूर्व आधुनिक भारतीय कला का परिचय एवं आधुनिक कला का प्रारंभ, अवनिंद्रनाथ टैगोर, से लेकर आधुनिक कला ग्रुप कोलकाता ग्रुप, प्रोग्रेसिय आर्टिस्ट ग्रुप और दिल्ली शिल्पी चक्र चक्र का वर्णन किया गया है। स्वतन्त्रता के पश्चात् नए कलाकारों द्वारा भारतीय चित्रकला का जिस रूप में विकास हो रहा था, उसका अपना मिन्न एवं मौलिक महत्त्व है। समसामयिक कलाकारों में पुरातन के प्रति आस्था और भविष्य के लिए उत्कण्ठा है। इन उत्तर आधुनिक चित्रकारों में में तैयब तैयब मेहता, मकबूल फिदा हुसैन, एन. एस. बैंद्र और बी. सी. सान्याल, सतीश गुजराल, रामकुमार, वी प्रमा, सरोज गोगी पाल, अपर्णा कौर, अंजनि इला मेनन, अनुपम सूद, अर्पित सिंह और ए रामचंद्र आदि का वर्णन किया है। निश्चित रूप से यह पुस्तक कला विद्यार्थियों तथा कला में रुचि रखने वालों (जिज्ञासुओं) के लिए प्रेरणादायक एवं लाभदायक रहेगी। इस पुस्तक को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार परिवर्तित पाठ्यक्रम व छात्रों की आवश्यकतानुसार तैयार किया गया है। अतः यह अवश्य ही पथ-प्रदर्शिका सिद्ध होगी। प्रस्तुत पुस्तक मेरे कई वर्षों के अध्ययन का परिणाम है। इस पुस्तक के लेखन में काफी परिश्रम किया गया है।
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