लेखक परिचय
गणेश एन. वेवी ने बड़ौदा में भाषा रिसर्च सेंटर व तेजगढ़ में आदिवासी अकादमी का गठन करने से पूर्व 1996 तक महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा में अध्यापन कार्य किया। आपने इन संस्थानों के माध्यम से आदिवासी एवं यायावर समूहों की संस्कृति, कला एवं भाषा के संरक्षण तथा विकास पर कार्य किया है। आपको साहित्य, आदिवासी शिल्प एवं भाषा संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु पद्मश्री सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। आप भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण (People's Linguistic Survey of India (PLSI) (ग्रंथमाला) के मुख्य संपादक हैं।
पुस्तक परिचय
आंध्र प्रदेश की भाषाएँ किसी समुदाय की भाषा के निर्माण में कई शताब्दियाँ गुज़र जाती हैं। मानव समुदायों द्वारा निर्मित सभी भाषाएँ हमारी सामूहिक सांस्कृतिक धरोहर हैं। यह सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक दायित्व है कि हमारे होते हुए उन्हें "विश्वव्यापी भाषासंहार" का सामना न करना पड़े। इसीलिए यह निर्णय लिया गया कि भारत के लोगों का भाषा सर्वेक्षण किया जाए। भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण भारतीय भाषाओं के सर्वेक्षण का राष्ट्रीय आंदोलन है, विशेष तौर पर खानाबदोशों, तटीय प्रदेशों, पहाड़ी स्थलों, द्वीपों एवं जंगलों में रहने वाले समुदायों और हाशिए के समुदायों की भाषा को समझना और उनका दस्तावेज़ीकरण करना इसका खास मकसद है। यह विद्वानों, लेखकों एवं कार्यकर्ताओं का विभिन्न बोली-समुदायों के सदस्यों के साथ साझेदारी में चलाया गया एक अभियान है। यह सर्वेक्षण एक त्वरित व गैर-पदानुक्रमित सार्वजनिक परामर्श और मूल्यांकन है, जिसका लक्ष्य विशेष रूप से भारत के लुप्तप्राय बोली-समुदायों के विकास के सांस्कृतिक प्रभाव का आकलन करना और सभी के स्वत्व एवं आत्मसम्मान को स्वीकार करना है। भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण का निर्देशन स्वैच्छिक रूप से संगठित राष्ट्रीय संपादक मंडल द्वारा किया गया है। भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण (PLSI) आंध्र प्रदेश की भाषाएँ (खंड 3. भाग ।) में इस प्रदेश में बोली जाने वाली 16 भाषाओं के सर्वेक्षण ब्यौरे के अतिरिक्त यहाँ बसने वाली जातियों, जनजातियों और विभिन्न भाषिक समुदायों की जानकारी सरल एवं प्रवाहमयी भाषा में दी गई है। प्रस्तुत खंड में शामिल भाषाएँ हैं- 1. तेलुगु, 2. दक्कनी उर्दू, 3. आंध्र प्रदेश में अल्पसंख्यक भाषाओं के रूप में अनुसूचित भाषाएँ, 4. एरुकला, 5. कुइ, 6. कुपिया, 7. कुवि, 8. कोंडा/कूबि, 9. कोया, 10. गदब, 11. गोंडी, 12. चेंचु, 13. मुलिया, 14. लंबाडी/बंजारा, 15. सवर, 16. आंध्र प्रदेश में अन्य गैर-अनुसूचित भाषाएँ। यह खंड भाषा की सही समझ और भाषा की क्षमता को जानने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। आंध्र प्रदेश में बसने वाले अन्य राज्यों के जातीय समूहों का विश्लेषण भी इस खंड में है। यह राज्य विविधता से परिपूर्ण है, इसलिए इस ग्रंथ में दी गई जानकारी भी ज्ञानवर्द्धक है। तेलुगु इस राज्य की प्रमुख भाषा तथा दक्कनी उर्दू दूसरी प्रमुख भाषा है। राज्य में द्रविड़, इंडो-आर्यन और ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार की भाषाएँ एवं बोलियाँ बोली जाती हैं। अब तक जिन भाषाओं को मान्यता नहीं मिली है, उन भाषाओं से संबंधित विवरण भी उनके आदिवासी प्रयोक्ताओं द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर इस खंड में शामिल किए गए हैं। पाठकों एवं शोधार्थियों की सुविधा हेतु प्रत्येक भाषा के सर्वेक्षण में उदाहरणों एवं उद्धरणों का हिंदी अनुवाद भी दिया गया है। संदर्भ के तौर पर पुस्तक में आंध्र प्रदेश का राजनीतिक एवं भाषाई मानचित्र भी दिए गए हैं।
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