Editers: Kishorilal Regar
Kuldeep Singh Meena
Dr. Prem Singh
Praveen Chand
पुस्तक परिचय
प्रस्तुत पुस्तक भारतीय साहित्य में भारतीय मूल्यों पर केन्द्रित है। जिसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्य में भारतीय फूल्यों जैसे राष्ट्रीय एकता, धार्मिकता, आध्यात्मिकता, सहिष्णुता, धर्म-निरपेक्षता, वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना, समन्वयदाट, दया, करुणा, प्रेम, सत्व, अहिंसा, अपरिग्रह, न्याय, समता, मानवतावाद, तप, निष्ठा, ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, वीरता, विश्वास, श्रद्धा, जन-कल्याण, रहस्यवाद, सौंदर्यबोध, जनतांत्रिक आस्था, श्रम, ममत्व, परस्पर सद्भावना आदि की सहज अभिव्यक्ति हुई है। भारतीय भाषाओं के आदिकालीन साहित्य से लेकर अधुनातन साहित्य में उपर्युक्त भारतीय मूल्य घनीभूत रूप से परिलक्षित होते हैं। इस पुस्तक में 38 आलेखों का प्रस्तुतीकरण किया गया है, जिसमें भारतीय साहित्य की परिकल्पना, विविध भाषाओं के साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन तथा तमिल, उर्दू, सिन्धी, हिन्दी, राजस्थानी आदि भाषाओं के साहित्य की विविध विधाओं में निहित जीवन-मूल्यों को प्रकट किया गया है। भक्तिकालीन साहित्य में अभिव्यक्त मूल्यों में जाम्भाणी साहित्य में निरूपित जीवन-मूल्य, प्रकृति सम्बन्धी मूल्य, संत कवियों के काव्य में आध्यात्मिक एवं सामाजिक मूल्य एवं नैतिक मूल्य को चित्रित किया है। साथ ही आधुनिक काल में साहित्य के बदलते हुए परिदृश्य में दलित, आदिवासी और स्त्री लेखन में निहित सामाजिक मूल्यों को वर्तमान संदर्भ में विश्लेषित करने का प्रयास किया गया है। हिन्दी उपन्यास, नाटक, कहानी, निबन्धों के साथ ही व्यंग्य जैसी विधाओं में निहित मूल्यों का प्रतिपादन किया है। इन प्रमुख भाषाओं के साथ राजस्थानी भाषा की विविध विधाओं में निरूपित राष्ट्रीय मूल्य, सामाजिक मूल्य और जीवन-मूल्यों का चित्रण किया गया है। इस विषय की महत्ता एवं प्रासंगिकता इसलिए भी औचित्यपूर्ण सिद्ध हो रही है कि यह पुस्तक केवल साहित्यिक ही नहीं बल्कि व्यक्ति व समाज को एक नई दिशा देने का सार्थक प्रयास है। इतना ही नहीं पुस्तक में सम्मिलित शोध-आलेख भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और उनसे जुड़ी तमाम सात्विक मानसिकताओं से उपजे भारतीय मूल्यों का उद्घाटन है, जो पूरे विश्व में भारतीयता और उसके अक्षुण्ण मूल्यों को प्रकाश में लाते हैं, जिसके कारण हमारी संस्कृति और साहित्य की पहचान विश्व पटल पर अलग ही दृष्टिगोचर होती है। इस पुस्तक में शोध-आलेखों के माध्यम से भारतीय साहित्य में निहित मूल्यों का उल्लेख कर उनके माध्यम से जीवन जीने तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर लाने का प्रयास कर नवीन साहित्य का सृजन करने का आह्वान किया है, जो निश्चित रूप से इस दिशा में एक नया कदम साबित होगा।
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