भूमिका
हमारे जीवन में अनेक घटनाएँ ऐसी होती हैं जो मोरसता को तोड़ती हैं और स्वच्छ पदचाप स्मृति पर अंकित कर जाती हैं। इनमें से कुछ घटनाएँ डर, रोमांच, भय और आतंक से जुड़ी होती हैं तो कुछ घटनाएँ महज एक संयोग एवं साहस का परिणाम होती हैं। मैंने लघु कहानियों के इस संकलन में व्यक्ति के मन की उस समय की वास्तविक स्थिति को समझने की कोशिश की है जब वे अनजान परिस्थितियों से घिरे होते हैं। प्रत्येक कहानी का चयन सावधानीपूर्वक किया गया है जिसमें यथार्थ एवं विचित्र पर आकस्मिक घटनाओं का संयोग दिखाई देता है। विदेश में रहते हुए अनजाने वातावरण से सामंजस्य बिठाना कई बार शारीरिक रूप से थकान और मनोवैज्ञानिक रूप से अशांत करनेवाला होता है। ऐसे समय में कभी-कभी परिचित परिवेश भी अपने आप में पराया तथा डरावना लगने लगता है जो हमारे अस्तित्व को झकझोर सा देता है। इतना ही नहीं ऐसी घटनाएँ हमें आरामदायक स्थिति से बाहर भी निकाल देती हैं। मैंने इस संकलन के माध्यम से जीवन के इसी तरह के विविध आयामी पहलुओं को बाहर लाने की कोशिश की है। एडमंड बर्क कहते हैं कि डर के सिवा ऐसा कोई भी जूनून नहीं है जो व्यक्ति की कार्य करने की शैली एवं तर्कशक्ति को प्रभावित करता है और यह बात इन कहानियों में भी देखी जा सकती है। इन कहानियों में मानव मन की इन्हीं रहस्यात्मक स्थितियों को सामने लाया गया है। ये विविध कहानियाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि पर आधारित हैं। 'वो ताम्बई चेहरा' कहानी सैंडर्सन के पूर्वी समाज के प्रति आकर्षण को सामने लाता है जिसमें वह सहज रूप से ताम्बई चेहरे से जुड़ जाता है और उसके बाद ही जीवन में अजीबोगरीब स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। उस चेहरे का अचानक गायब हो जाना हमारे शक को और बढ़ाता है जिससे पाठक के मन में उत्सुकता तो बढ़ती ही है साथ ही एक डर भी पैदा होता है। दूसरी तरफ 'ग्लिस्टर की आहट' कहानी उपनिवेशवादी तर्क और विज्ञान से परे पूर्ण यांत्रिक, गतिशील सभ्यता तथा रीति-रिवाज को अपने में समेटे हुए है। यह कहानी अत्यंत प्रभावशाली बिंबों के माध्यम से पाठक को रहस्यमयी दुनिया की सैर कराती है। 'आत्माएँ ही आत्माएँ' कहानी में पाठक पूरी दूनिया की सैर करते हुए उत्तरी अमेरिका पहुँचता है जहाँ वह उसकी विशिष्ट स्थिति का आनंद लेता है। डाक गाड़ी के अनुभव पाठक के अपने अनुभव बन जाते हैं। यह सचमुच घबराहट पैदा करने वाली स्थिति है कि यदि मैं ऐसी परिस्थिति में फँस जाऊँ तो क्या करूँगा? लेकिन मुझे लगता है कि यही वह परिस्थिति है जो हमारे जीवन को रोमांचक बनाती है- अप्रत्याशित का रोमांच ! इन कहानियों का संपादन मेरे लिए आनंददायक रहा है और मैं आशा करता हूँ कि इन कहानियों के पाठक भी इसे पढ़कर आनंदित होंगे।
लेखक परिचय
रस्किन बॉण्ड मसूरी में रहनेवाले जाने-माने लेखक और विख्यात कहानीकार हैं। पिछले पचास वर्षों से वे उपन्यास, कविता, निबंध व लघुकथाएँ लिख रहे हैं। उनकी 'टेल्स एंड लेजेंड्स फ्रॉम इंडिया', 'एंग्री रिवर', 'स्ट्रेंज मेन स्ट्रेंज प्लेसेज', 'दि ब्ल्यू अंब्रेला', 'ए लाँग वाक फ्रॉर बीना' और 'हनुमान टु दि रेस्क्यू' भी रूपा पेपरबैक में उपलब्ध हैं। रस्किन बॉण्ड की पुस्तक 'चिल्ड्रंस ओमनीबस' को अनेक वर्षों से बच्चों ने बहुत पसंद किया। 'घोस्ट स्टोरीज फ्रॉम दि राज', 'दि रूपा बुक ऑफ ग्रेट एनीमल स्टोरीज', 'दि रूपा बुक ऑफ टू टेल्स ऑफ मिस्ट्री एंड एडवेंचर', 'दि रूपा बुक ऑफ रस्किन बॉण्ड्स हिमालयन टेल्स', 'दि रूपा बुक ऑफ ग्रेट सस्पेंस स्टोरीज', 'दि रूपा लाफ्टर ओमनीबस', 'दि रूपा बुक ऑफ स्केरी स्टोरीज', 'दि रूपा बुक ऑफ हॉन्टेड हाउजिज', 'दि रूपा बुक ऑफ ट्रेवलर्स टेल्स' आदि रूपा से प्रकाशित उनके संकलन हैं। अपने असाधारण साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें 1957 में जॉन लीवेलियन राइस मेमोरियल पुरस्कार, 1992 में साहित्य अकादमी अवार्ड (भारत में अंग्रेजी भाषा में लेखन के लिए), 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
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