लेखक परिचय
शची मिश्र भोजपुरी संस्कृति की विदुषी हैं। 'भोजपुरी के संस्कार गीत', 'गितियन खनके अंगनवी', 'भोजपुरी के ऋतु गीत', 'भोजपुरी के प्रणयगीत नकटा', 'लोक रामायण' एवं 'भोजपुरी की लोक कथाएँ' शीर्षक पुस्तकों का उन्होंने सृजन एवं संपादन किया है। इसके अतिरिक्त वे एक प्रतिष्ठित उपन्यासकार भी हैं। 'पांचाली', 'चाय कॉफी उर्फ तीसरी दुनिया', 'माधवी की देहगाथा', 'यानी की फुल्ली फालतू' एवं 'निरबसिवा' उनकी महत्वपूर्ण औपन्यासिक कृतियाँ हैं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। संप्रति, पुणे में रहकर स्वतंत्र लेखन कर रही हैं। इन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'साहित्य भूषण' सहित अनेक सम्मान प्राप्त हैं।
पुस्तक परिचय
पुस्तक में लोकनाट्य के इतिहास, भेद, तत्व एवं विशेषताओं के साथ ही आधुनिक रंगमंच तथा भोजपुरी लोकनाट्य के उद्भव एवं विकास पर चर्चा की गई है। साथ ही स्त्री लोकनाट्य, 'जनुआ' को एक संपूर्ण स्त्री-विमर्श मानते हुए उसके संबंध में जानकारी के साथ उसकी प्रासंगिकता एवं महत्व पर भी विचार किया गया है। आज जलुआ परंपरा क्यों वित्तुप्ति के कगार पर है तथा इसका संरक्षण कैसे किया जाए-लेखिका ने इस पर भी विचार किया है और अंत में, पुस्तक में, जलुआ-अवसर के कुछ गीत भी संकलित किये गए हैं।
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