पुस्तक परिचय
ब्लड प्रेशर का संबंध रक्त से होता है, किंतु रक्त इसका कोई कारण नहीं होता। इसका कारण वायु विकार होता है। यही कारण है कि प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति में इसको वात रोग भी स्वीकार किया गया है। मानव शरीर में प्रतिक्षण रक्त का संचार होता रहता है, लेकिन इस संचरण में कभी-कभी वायुदोष कुपित होकर अपने प्रभाव से रक्त संचार में कमी अथवा आधि-- क्य उत्पनन करके रक्त के स्वाभाविक संचारण में व्यवधान उत्पन्न कर देता है। इसका परिणाम यह होता हे कि मस्तिष्क की ओर जाने वाले रक्त का चाप या तो अधिक हो जाता है या कम हो जाता है। इसी को 'रक्तचाप' अथवा 'ब्लडप्रेशर' कहा जाता है। यदि रक्तचाप का ज्ञान आरंभिक अवस्था में हो जाता है तो यह संभव है कि भावी जीवन में उसको अधिक कठिनाई न हो। यह भी संभव है कि उसका रोग संर्वथा ठीक हो जाए। अतः पुस्तक में आपको ब्लडप्रेशर के कारण, ब्लड प्रेशर जानने की विधियां, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, ब्लड प्रेशर का उपचार तथा योग से कंट्रोल आदि सारी जानकारियां प्राप्त होंगी।
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