प्रस्तावना
'ब्रह्मचर्य' भारतीय वांग्मय का प्रसिद्ध आश्रम है। वैदिक काल से प्रचलित संस्कृत शब्द "ब्रह्मचर्य" का अर्थ है "ब्रह्म (ईश्वर) में आचरण करना।" दूसरे अर्थ में सभी इंद्रियों को शारीरिक, मानसिक और वाचिक रूप से संयमित करने को ब्रह्मचर्य कहते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि किसी भी व्यक्ति को ब्रह्मचर्य कब, क्यों और कैसे धारण करना चाहिए? ब्रह्मचर्य, मानव जीवन का मूल स्तंभ है। चाहे वह व्यक्ति गृहस्थ हो या संन्यासी, लौकिक उत्त्नति की इच्छा रखता हो या आत्मिक जागरण की ब्रह्मचर्य उसके लिए अनिवार्य है। इसके बिना न तो पूर्ण स्वास्थ्य संभव है, न मन की स्थिरता, और न ही आत्म साक्षात्कार या भगवत् प्राप्ति। आज का युग भौतिकवाद और अनियंत्रित जीवन शैली से ग्रस्त है। ऐसे समय में यह पुस्तक "ब्रह्मचर्य : कब, क्यों और कैसे?" विद्यार्थियों, युवाओं, गृहस्थों, महिलाओं व विरक्तों - सभी के लिए एक सार्थक दिशा और प्रेरणा प्रदान करती है। यह पुस्तक न केवल ब्रह्मचर्य के शास्त्रीय सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है, अपितु उन युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो दुराचार, हस्तमैथुन, स्वप्नदोष जैसी मानसिक एवं शारीरिक दुर्बलताओं से जूझ रहे हैं। यह पुस्तक पूज्य महाराजश्री के सत्संग, एकांतिक वार्तालाप, तथा शास्त्रों व महापुरुषों के वचनों के सार से संकलित की गई है। पूज्य महाराजश्री से पूछे गए वास्तविक प्रश्नों और उनके उत्तरों के माध्यम से, यह पुस्तक समस्याग्रस्त लोगों को व्यावहारिक समाधान और आंतरिक बल प्रदान करने का कार्य करती है। यह एक
पुस्तक परिचय
"ब्रह्मचर्य" भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का अमूल्य रत्ल है। 'ब्रह्मचर्य' का शाब्दिक अर्थ है 'ब्रह्म में विचरण करना अर्थात् परमेश्वर का चिंतन करना और अपनी जीवन-ऊर्जा, वीर्य-शक्ति का संरक्षण करना'। आज के भौतिकवादी युग में स्वाभाविक ही प्रश्न उठता है कि ब्रह्मचर्य का पालन क्यों आवश्यक है? इसका उत्तर स्पष्ट है ब्रह्मचर्य एक दिव्य महाव्रत है, जिसकी साधना से साधारण मनुष्य भी महापुरुष बन सकता है। इस व्रत का पालन करने से आत्मा की आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं, जिससे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र बौद्धिक, मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक में असीम शक्ति, अद्भुत संतुलन, पवित्रता व दिव्यता का प्रसार होता है। यह पुस्तक केवल सैद्धांतिक उपदेशों का संग्रहमात्र नहीं है बल्कि यह तो एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है, जो इस जटिल पथ पर चलने वाले साधकों, विशेषकर हस्तमैथुन, स्वप्नदोष जैसी समस्याओं से जूझ रहे युवाओं के लिए एक प्रकाश-स्तंभ का कार्य करती है। इसमें केवल समस्याएँ ही नहीं गिनाई गई हैं, अपितु उनका सरल, वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत किया गया है। पूज्य महाराजश्री के अनुभव-सिंचित उपदेशों और अमूल्य जीवन-सूत्रों से सुसज्जित यह ग्रन्थरत्न पाठकों को आत्मनियंत्रण, नियमित साधना और अन्तःशक्ति का वास्तविक महत्त्व समझाता है। निःसंदेह, यह पुस्तक आपके जीवन में एक नयी दिशा, अदम्य दृढ़ता और आंतरिक प्रकाश का संचार करने में पूर्णतः सक्षम है।
Hindu (हिंदू धर्म) (13669)
Tantra (तन्त्र) (1007)
Vedas (वेद) (730)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2086)
Chaukhamba | चौखंबा (3183)
Jyotish (ज्योतिष) (1563)
Yoga (योग) (1166)
Ramayana (रामायण) (1335)
Gita Press (गीता प्रेस) (724)
Sahitya (साहित्य) (24711)
History (इतिहास) (9025)
Philosophy (दर्शन) (3633)
Santvani (सन्त वाणी) (2622)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist