पुस्तक परिचय
हर परिवेश और संस्कृति की अपनी जीवन-शैली, अवधारणाएँ, आदर्श, जटिलताएँ और घटनाएँ होती हैं, जिनमें समय के अनुसार बदलाव होते रहते हैं। बावजूद इन सब बातों के मनुष्य की प्रवृत्ति, अनुभूति और संकल्पनाएँ एक सार्वभौमिक परिघटना के इर्द-गिर्द आवृत्त होती रहती हैं। इस भंवर में, जिंदगी अपने अनगिनत पहलुओं को थामे हुए लगातार घूमती है। उस घूमती जिंदगी के किसी खास पहलू को पकड़ पाने की हर संभव कोशिश कहानीकार बार-बार करता है और असंतुष्ट होता रहता है। यही असंतुष्टि उसकी भविष्यत कहानियों की पृष्ठभूमि तय करती है। दुनियावी बहाव में जीवन के घूर्णन और मंथन से निकली घटनाएँ, भाषा और संवेदना की आँच में पक कर कहानियाँ बन जाती हैं। कहानियों का यह कोश, सूर्य द्वारा युधिष्ठिर को दिए गए 'अक्षय पात्र' की तरह कभी खाली नहीं होता। 'अक्षय पात्र तो फिर भी, द्रोपदी द्वारा भोजन किए जाने के उपरांत कुछ समय के लिए ही सही, खाली हो जाता था, मगर जीवन के इस कोश में जटिलताओं और घटनाओं की परिव्याप्ति इतनी है कि लगातार अभिव्यक्त किए जाने के बाद भी यह कभी खाली नहीं होता, क्योंकि हर घटना, अतीत की आवाज़ होकर भी, हरेक वर्तमान में अपना परिवेश और परिस्थितियाँ बदल लेती है
Hindu (हिंदू धर्म) (13691)
Tantra (तन्त्र) (1006)
Vedas (वेद) (728)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2084)
Chaukhamba | चौखंबा (3181)
Jyotish (ज्योतिष) (1563)
Yoga (योग) (1166)
Ramayana (रामायण) (1335)
Gita Press (गीता प्रेस) (723)
Sahitya (साहित्य) (24739)
History (इतिहास) (9038)
Philosophy (दर्शन) (3633)
Santvani (सन्त वाणी) (2631)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist