सौभाग्य से तीनों यात्रियों ने अपनी-अपनी यात्राओं के विस्तृत संस्मरण लिखे। वे आज भी सुरक्षित हैं। यह पुस्तक उन्ही संस्मरणों पर आधारित है। ये संस्मरण चौथी से सातवीं शताब्दी तक के भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण साधन हैं। उनके अध्ययन से उस समय के बौद्ध धर्म की स्थिति, धार्मिक सह-अस्तित्व, दान और परोपकार की परंपरा, अतिथि सत्कार, उच्चकोटि की शैक्षिक व्यवस्था, विद्वानों का आदर, साहित्यिक उपलव्धि, बहुमंजिला भवनों का निर्माण, धातु विज्ञान, खगोल विद्या, चिकित्सा विज्ञान, चित्रकारी, पच्चीकारी, मूर्तिकला, खनिज विज्ञान एवं संपदा, आर्थिक समृद्धि, राजनैतिक और सामाजिक व्यवस्था आदि पक्षों की एक सुंदर तस्वीर हमारे सामने उभरकर आती है।
किंतु हमने देखा है कि अच्छे पाठ्यक्रम और अच्छी पाठ्यपुस्तकों के बावजूद हमारे विद्यार्थियों की रुचि स्वतः पढ़ने की ओर अधिक नहीं बढ़ती। इसका एक मुख्य कारण अवश्य ही हमारी दूषित परीक्षा-प्रणाली है जिसमें पाठ्यपुस्तकों में दिए गए ज्ञान की परीक्षा ली जाती है। इस कारण बहुत ही कम विद्यालयों में कोर्स के बाहर की पुस्तकों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। लेकिन अतिरिक्त-पठन में रुचि न होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों के लिए कम मूल्य की अच्छी पुस्तकें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी नहीं हैं। यद्यपि पिछले वर्षों में इस कमी को पूरा करने के लिए कुछ काम प्रारंभ हुआ है पर वह तो बहुत ही नाकाफी है।
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