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Dhammalipi Dictionary (Words of Asokan Inscriptions In the Dhammalipi, Roman and Devanagari Scripts)

$33
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Specifications
Publisher: DHAMMALIPI PUBLICATION, BHOPAL
Author Motilal Alamchandra
Language: PRAKRIT, PALI, ENGLISH AND HINDI
Pages: 264
Cover: HARDCOVER
9x6 inch
Weight 390 gm
Edition: 2025
ISBN: 9788198708649
HCD155
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Book Description
पुस्तक परिचय
मोतीलाल आलमचंद्र कृत "धम्मलिपि शब्दकोश" प्राचीन भारत की अनेक गुथियों को सुलझाने की क्षमता रखता है। मोतीलाल आलमचंद्र बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने कठिन परिश्रम कर धम्म राजा असोक के अभिलेखों में प्रयुक्त शब्दों का यह धम्मलिपि शब्दकोश तैयार किया है। कोशकार ने कोश के आरंभ में ही धम्मलिपि की मुकम्मल वर्णमाला एवं अंक, तालिका प्रस्तुत कर कोश. पाठकों को सुविधा प्रदान की है। धम्मलिपि में वर्णक्रम से शब्दकोश का संपादन किया गया है। धम्मलिपि में लिखे गए शब्दों का फिर हिंदी में रूपांतरण है। पुनः आगे इन शब्दों का हिंदी तथा अंग्रेजी में अर्थ दिए गए हैं। लिपिकार ने धम्मलिपि के शब्दों के साथ कोष्ठक में उनके संदर्भ देकर डिक्शनरी की प्रमाणिकता पर मुहर लगा दी है। कुल मिलाकर "धम्मलिपि शब्दकोश" प्रामाणिक तथा पठनीय बन पड़ा है। शब्दकोशों का इतिहास इस बात का गवाह है कि कोश निर्माण सतत प्रक्रिया है। शब्दकोशों में परिमार्जन, परिवर्धन जीवन भर चलत रहता है। फिलहाल मोतीलाल आलमचंद्र के प्रति विशाल भारत की विराट जनता इस कार्य के लिए आभारी रहेगी।

लेखक परिचय
मोतीलाल आलमचंद्र प्रख्यात धम्मलिपिकार हैं एवं प्रसिद्ध 'सींची दानं पुस्तक के लेखक है। सम्राट अशोक के शिलालेखों की भाषा और लिपि पर गहरी पकड़ रखने वाले मज़बूत स्तंभ हैं। इसके साथ कवि, उपन्यासकार, सामाजिक विचारक भी हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन की राज्य प्रशासनिक सेवा अन्तर्गत शिवपुरी जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। आपकी जिंदगी का अंकुरण मध्यप्रदेश राज्य के अंतर्गत अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील अन्तर्गत ग्राम बहेरिया में हुआ। हाईस्कूल की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय अशोकनगर से और हायर सेकेंडरी की शिक्षा भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से प्राप्त की। झीलों की नगरी भोपाल स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय से स्नातक और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से स्नातकोत्तर की शिक्षा पूर्ण की। आधुनिक विचारों से लबालब हैं। पुरातात्विक आधार पर भारत के इतिहास को पुनः परिभाषित कर पुनः स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अभी तक आपकी कुल ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित हैं। साँची के अभिलेखों की गहरे से पड़ताल करती और धम्मलिपि सिखाने वाली लोकप्रिय "साँची दानं" पुस्तक से आप खासे परिचित हैं। भरहुत के स्तूप के शिलालेखों पर केन्द्रित पुस्तक "भगवत दानं" भी बहुत महत्वपूर्ण कृति है। धम्मलिपि शब्दकोश के अलावा धम्मलिपि और पालि व्याकरण, साँची और सारू-मारु, सिंह विनय, चपडघाट, कितने भारत एक सामाजिक वेदना, मधुमासगंज, नई कॉपलें, आपकी महत्त्वपूर्ण कृत्तियाँ हैं। धम्मलिपि शब्दकोश का प्रथम संस्करण भारत के हर राज्य, हर भाषा क्षेत्र के पाठकों में पठनीय एवं चर्चित रहा।

भूमिका
धम्मलिपि शब्दकोश में प्रतिबिंबित असोक-राज मोतीलाल आलमचंद्र, बौद्ध अध्ययन एवं शिलालेखी प्राकृत के मर्मज्ञ हैं। आपने पूर्व लिखित पुस्तक "साँची दानं" (2020 ई.) में अपनी मर्मज्ञता साबित कर दी है। शिलालेखी प्राकृत का सबसे अनमोल खजाना " असोकीय प्राकृत" है। धम्म राजा असोक के अनेक अभिलेख लाटों पर मिलते हैं। इसलिए कुछ विद्वान असोकीय प्राकृत को "लाट प्राकृत" भी कहते हैं। कुछेक अभिलेख गुफाओं में भी हैं। इसीलिए प्राकृत मर्मज्ञ पिशेल ने इसे "लेण प्राकृत" कहा है। लेकिन धम्म राजा असोक के सबसे अधिक अभिलेख चट्टानों पर हैं। इसलिए "असोकीय प्राकृत" या "असोकन प्राकृत" अधिक लोकप्रिय है। "असोकीय प्राकृत" का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन अनेक भाषाविदों ने किया है। भाषा वैज्ञानिक अध्ययन के क्रम में असोकीय प्राकृत में मौजूद अनेक जटिल शब्दों की अर्थ-मीमांसा भी की गई है। इस कोश में मोतीलाल आलमचंद्र ने धम्म राजा असोक द्वारा प्रयुक्त शब्दों का कोशाकार व्यवस्थित करने का विराट प्रयास किया है। साल 2021 ई. में "डिक्शनरी ऑफ असोकाज इंस्क्रिप्शनस" नामक शब्दकोश भी आया है। इसे डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह तथा प्रिया रत्नम ने संपादित किया है। " असोकीय प्राकृत" का यह शब्दकोश रोमन, देवनागरी और धम्मलिपि में है।" धम्मलिपि शब्दकोश" इसकी अगली कड़ी है।

प्रस्तावना
धम्मलिपि में लिखे शब्दों के अर्थ खोजना मेरे लिए उतना ही दुरूह कार्य रहा है जितना मिट्टी में दफन अयस्क में से धातु छानना। चमड़े के पटरे पर लिखे को जला दिया गया, धातुलेखों को पिघला दिया गया, पुस्तकालय को आग के हवाले कर दिया गया। दर, दीवार, महल और किला ध्वस्त कर दिए गये। जो धूल धक्कड़ में दबा रह गया वही आज पुरातात्विक विभाग को मिला और उसी छोटे से लेखन से समणों के उजियारे इतिहास की झलक हमें देखने मिलती है। धम्मलिपि और पालि भासा में वह ताकत है जो पुरातात्विक आधार पर सांस्कृतिक पुनः प्रवर्तन कर सकती है। बुद्ध ने धम्म का पुनः प्रवर्तन किया था अब समय आ गया है बुद्ध के ज्ञान को पुनर्स्थापित करने के लिए पाली पुनः प्रवर्तन करें। धम्मलिपि पुनः प्रवर्तन करें। यह कार्य आपको स्वयं से प्रारंभ करना होगा। अपने घर से करना होगा। अपने बच्चों से करना होगा। पिता भाई से करना होगा। अपने आप से करना होगा। जितने जल्दी रसोई पकेगी उतनी जल्दी मोहल्ले में खुशबू बिखेरेगी। आप अपनी हांडी चढाईये, स्वाद की परख रखने वाले अपने आप खिंचे चले आएँगे। बुद्ध ने धम्मचक्क प्रवर्तन किया। धम्मचक्क प्रगति का सूचक है, नवाचार का सूचक है भावसुद्धि का सूचक है, मानवता का वाहक है, जीवन है, दूसरो शब्दों कहें प्रवर्तन अर्थात् prophethood, induction, origination bear upon, बुद्ध कठोर तो हो नहीं सकते इसलिए प्रवर्तन का शाब्दिक अर्थ enforcement तो हो नहीं सकता। प्रवर्तन का शाब्दिक अर्थ induction, origination, bear upon, बुद्ध के ज्यादा करीब अनुवाद है।

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