डॉ. दिलीप मेहरा जन्म: 27/10/1968 माता/पिता : मेहरा मंजुलाबहेन, मेहरा कालिदास सोमाभाई गाँव : देवगढ़ बार, ता. विरपुर, जि. महिलागर, गुजरात शिक्षण : एम.ए. (स्वर्णपदक प्राप, गुजरात यूनि.), एम.फिल., पीएच.डी. अनुभव : 31 वर्ष अध्यापन कार्य पुरस्कार : नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया (उत्तर प्रदेश) द्वारा नागरीरत्न सम्मान 2016 भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा अंबेडकर फेलोशिप 2011 महाराष्ट्र दलित साहित्य अकादमी भुसावल द्वारा रवीन्द्रनाथ टैगोर लेखक पुरस्कार 2010 * गुजरात हिन्दी साहित्य अकादमी 2018 में मकान कहानी वार्ता संग्रह द्वितीय पुरस्कार तथा दलित संदर्भ और हिन्दी उपन्यास (आलोचना ग्रंथ) 2019 में प्रथम पुरस्कार 21 सदी के हिंदी कथा साहित्य में किन्नर विमर्श के लिए 2022 आलोचना का प्रथम पुरस्कार संपादन: प्रधान संपादक साहित्य वीथिका त्रैमासिक (अन्तर्राष्ट्रीय) आलेख : 150 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित प्रकाशन : मन्नू भंडारी के कथा साहित्य में मानव जीवन की समस्याओं का निरूपण साठोत्तरी हिंदी उपन्यास (संपादन) हिन्दी काव्य (संपादन) हिंदी उपन्यास नए आयाम (लेख संग्रह) मध्यकालीन दृश्य श्रव्य माध्यम विविध परिप्रेक्ष्य (आलोचना) हिंदी कथा साहित्य में दलित विमर्श (संपादन) हिंदी महिला कथाकारों के साहित्य में नारी विमर्श, प्रेमचंद के कथा साहित्य में सामाजिक सरोकार, (संपादन) 21 सदी के मकान पुराण गद्य साहित्य (संपादन) हिंदी उपन्यासों में किन्नर समाज (संपादन) (कहानी संग्रह) दलित संदर्भ और हिंदी उपन्यास (आलोचना) हिंदी कथा साहित्य में वृद्ध विमर्श (संपादन) हिंदी कथा साहित्य में आदिवासी संवेदना (संपादन)
आधुनिक हिन्दी उपन्यास परम्परा में धर्मवीर भारती उन ख्यातिलब्ध रचनाकारों में प्रतिष्ठित हैं, जिन्होंने उपन्यास को केवल कथा-विन्यास तक सीमित न रखकर उसे व्यक्ति की आंतरिक संवेदना, सामाजिक यथार्थ और ऐतिहासिक चेतना से जोड़कर अपनी रचनाओं को बुना है। इनके उपन्यासों में मनुष्य की मानसिक जटिलताएँ, नैतिक द्वंद्व, प्रेम, विद्रोह और सत्ता के प्रश्न अत्यंत गहराई से उभरते हैं। इनके उपन्यास साहित्य में जहाँ गुनाहों का देवता में भावनात्मक प्रेम और सामाजिक मर्यादा का संघर्ष है, वहीं सूरज का सातवाँ घोड़ा नवीन कथात्मक शैली का प्रयोगात्मक रूप है। प्रो. दिलीप मेहरा समकालीन साहित्यालोचकों में अपनी गहरी पैठ बना चुकें हैं। इनका अध्ययन, चिंतन और सम्यक दृष्टि धर्मवीर भारती के उपन्यासों को नवीन आयाम प्रदान करती है। यह कृति 'धर्मवीर भारती का उपन्यास साहित्य : पुनर्पाठ' इसी का प्रतिरूप है। जिसमें इन्होंने भारती जी के उपन्यास साहित्य का गहन विश्लेषण कर नई स्थापनाएँ प्रस्तुत की हैं।
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