कतिपय अंग्रेज राजनीतिज्ञों और विद्वानों ने भारत में ब्रिटिश शासन को इस देश के लिये लाभदायक बता कर अपनी औपनिवेशिक नीतियों को उचित ठहराया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात अनेक इतिहासकारों ने 'उपयोगितावाद' के इस सिद्धान्त को खोखला बताते हुए यह सिद्ध किया है कि अंग्रेजों ने भारत को गरीब बनाया। प्रस्तुत ग्रन्थ में ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की आर्थिक नीतियों और भारतीय जनता पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
वर्तमान में देश के अनेक विश्वविद्यालयों में इतिहास की स्नातक और स्नात्तकोत्तर कक्षाओं के पाठ्यक्रम में भारत के आर्थिक इतिहास से सम्बन्धित विषयों का समावेश किया गया है। प्रस्तुत पुस्तक में अंग्रेजों के शासन काल की आर्थिक समस्याओं एवं नीतियों का शोधपूर्ण अध्ययन करने वाले विद्वानों की प्रकाशित पुस्तकों व लेखों के आधार पर विवेचन करने का विनम्र प्रयास किया गया है। आशा है यह पुस्तक विश्वविद्यालयों, कालेजों के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के लिये उपयोगी सिद्ध होगी।
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