भूमिका
यह स्वाभाविक है कि गाँधी एक विमर्श को एक पुस्तक के रूप में तैयार करने के लिए अनेक विद्वतजन की सुप्रसिद्ध कृक्तियों की सहायता ली। जिनका मै हृदय से आभारी हूँ, गाँधी विमर्श पुस्तक की रूपरेखा तैयार करने में मेरे पूज्य पिता श्री बासुदेव सिंह ने मुझे तथ्यों के साथ-साथ प्रेरणा भी देते रहे उन्ही के आर्शीवाद स्वरूप मुझसे गाँधी एक विमर्श पर पुस्तक लिखने का साहस हुआ। मेरी जननी स्व० सुदामा सिंह को मुझे लेकर हमेशा निर्देशित करती थी कि तुम्हे भीड़ से अलग कुछ कार्य करना है। आज जो कुछ भी मैं हूँ वह सब उन्ही के आर्शीवाद के फलस्वरूप है जो सदैव मुझे विषम परिस्थितीयों में भी साहस और सम्बल प्रदान करता रहता है। इस प्रकार लेखन में मेरे बड़े भाईयों राजेश वत्स, प्रो० दिनेश वत्स, उमेश वत्स ने समय-समय पर कार्य के प्रति मेरे शिथिलता को देखते हुवे मुझे उत्साहित करते रहते है। मैं अपने सभी भाइयों का आभारी हूँ। पुस्तक के अध्याय अनुक्रमणिका बनाने में मेरे मित्र व अनुज डॉ० देव ब्रत मिश्र का अतुलनीय सहयोग रहा। पुस्तक लेखन व उसके सम्पादन में व्यस्त होने के कारण परिवार में कम समय देने के कारण भार्या नमिता सिंह ने मुझे निरन्तर प्रोत्साहित किया कि आप अपने लेखन कार्य को निरन्तरता और गति प्रदान करके जल्द से जल्द इसे पूर्ण करें। इस कार्य में मेरी दोनो पुत्रियां जान्हवी सिंह एवं यशी सिंह ने अपना सहयोग व स्नेह दिया। गाँधी विमर्श के सिद्वान्तो के संकलन में मेरी बहनो एवं बहनोई प्रतिभा सिंह, डॉ० देवेन्द्र कुमार सिंह एवं सरिता सिंह विनय सिंह ने बहुत से सैद्धान्तिक तथ्यों को लिखने में मेरा सहयोग किया जिनका ऋणी हूँ।
लेखक परिचय
डॉ मनोज कुमार कत्रा सम्प्रति विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र राजा श्री कृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर में कार्यरत हैं। डॉक्टर वत्स का स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्ययन का अनुभव 18 वर्ष का है शोध कार्य का अनुभव 15 वर्ष से चल रहा है। डॉ वत्स समाजशास्त्र एवं जनसंचार विषय में स्नातकोत्तर उपाधि धारक है, साथ ही साथ आप विधि स्नातक भी है। समाजशास्त्र के साथ-साथ पत्रकारिता एवं कानून विषय में विशेषज्ञता हासिल कर रखें हैं। डॉक्टर वत्स एक दर्जन से अधिक सामाजिक एवं शैक्षणिक संगठनों के आजीवन सदस्य है तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगठनों की फेलोशिप मिली हुई है। डॉ वत्स के निर्देशन में शोध कार्य अनवरत रूप से चल रहा है। डॉ वत्स ने दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में अपना व्याख्यान दिया है। डॉ वत्स के शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। शैक्षणिक और पर्यावरण के क्षेत्रों में कार्य करने पर कई पुरस्कार भी मिले हैं। शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा डॉ वत्स अंग्रेजी समाचार पत्र द पायनियर के ब्यूरो चीफ हैं एवं जौनपुर पत्रकार संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी हैं। आप जनपद के प्रशासनिक समितियों तथा राइफल क्लब, जौनपुर क्लब, टीबी फोरम, लैंगिक उत्पीड़न की स्थानीय परिवार समिति के सदस्य तथा भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी जौनपुर के सचिव भी है। डॉ वत्स महाविद्यालय शिक्षक संघ इकाई के अध्यक्ष पद पर रहकर शिक्षकों की समस्याओं के निदान में भी सदैव संघर्षरत रहते हैं।
पुस्तक परिचय
नहीं नीलं सहस्नेह शिल्पि पीतम् कर्तुम् शक्यते। सत् से सत्य की उत्पति हो सकती है। असत्य से सत्य विस्पन्न नहीं हो सकता। गाँधी ने यही सोचकर साधन शुद्धि और अहिंसा को ही सत्याग्रह साधन माना। जिस प्रकार सत्य से सत्य की उत्पति होती है। उसी प्रकार हिंसा से हिंसा ही निकलेगी। प्राचीन काल में महाभारत का युद्ध हमें इंगित करता है कि हिंसा, धोखाधड़ी या गलत साधनों से कितना बड़ा विनाश हो सकता है। आज तो शस्त्र की शक्ति मानवी कल्पना से भी ऊपर विध्वंसकारी हो गयी है। प्रारंभ में मानव जाति मल्ययुद्ध करती थी। और अपने नाखून और दाँतों का प्रयोग परस्पर युद्ध में करते थे। बाद में धनुषवाण और गदा हमारे युद्ध के उपकरण बने। धातु युग में वरछी, भाला, तलवार, बघनखा आदि से हम लड़ने लगे और बारुद युग में बन्दूक, तोप और बम से युद्ध होने लगे लेकिन बीसवीं सदी में हमने परमाणु बम का उपयोग कर प्रलय की भूमिका तैयार कर ली है। आज तो दुनिया के लगभग 15 देशों के पास अणु-परमाणु और हाईड्रोजन बम पड़े हुए हैं। जिसका प्रयोग होने पर सारी सृष्टि ही स्वाहा हो जायेगी और मानवता का शीतहास ही समाप्त हो जायेगा। इसीलिए अणु बम का एकमात्रा विकत अहिसा हो है।
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