मुझे यह जानकर अत्यन्त हर्ष हो रहा है कि श्री केशर सिंह राय जी ने अपनी व्यस्तता के बावजूद भी जौनसार बावर के परिपेक्ष में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पुस्तक 'हारूलः जौनसारी हिमाचली वीर गाथाएं' को प्रकाशित करने जा रहे हैं।
यह पुस्तक एक शोधपूर्ण कृति है। "हारुल" पौराणिक गाथाओं को लयबद्ध तरीके से गाये जाने वाले गीत को कहते हैं। हारुल जौनसार बावर क्षेत्र के मौखिक परम्पराओं का अलिखित स्रोत है व जौनसार बावर के इतिहास का प्रतिविम्ब है। इस क्षेत्र में हारुल मौखिक प्रसारण का एक बहुमुल्य इतिहास का खजाना है, जिसको गायकी के माध्यम से जौनसार बावर के लोगों ने हर त्याहारों में सामूहिक गीत के रूप में गाकर पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित व संजोये रखा है। जौनसार बावर की अपनी विशेष मान्यताओं और परम्पराओं के कारण एक विशेष सांस्कृतिक पहचान है। यह क्षेत्र भले ही आर्थिक दृष्टि से समृद्ध न हो, लेकिन सांस्कृतिक व आन्तरिक सन्तुष्टता से परिपूर्ण है। यह भी सत्य है कि जिस देश की सांस्कृतिक पहचान समाप्त हो जाती है, वह देश विलुप्त होने की ओर अग्रसर होता जाता है। श्री केशर सिंह राय जी के अथक प्रयास से हारुलों में छुपा सैकड़ों वर्षों का इतिहास को लिखित रूप देने से इस क्षेत्र के विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए नया आयाम व ऊर्जा प्रदान करेगा।
श्री केशर सिंह राय एक सरल स्वभाव के समाजसेवी और एक कुशल हिन्दी प्रवक्ता होने के साथ-साथ उत्तराखण्ड के जनजातिय समाज जैसे कि जौनसारी, थारू, बोक्सा, भोटिया व राजी क्षेत्रों के लिए बहुत ही सराहनीय कार्य कर रहे हैं। इनको जनजातिय समाज के रीति-रिवाज से अटूट आस्था है और जनजातिय नृत्य व संगीत के प्रति असीम प्रेम है जो कि इनके खुद की मंच प्रर्दशन में झलकता है, जहाँ वे कई बार पारितोषिक से भी सुसज्जित हुए हैं। श्री केशर सिंह राय जी के इसी लगाव ने उन्हें यह पुस्तक लिखने के लिए प्रोत्साहित किया है।
मैंने भी अपनी जौनसार बावर पर क्वबजवतंस त्मेमंतबी (शोध) के दौरान पाया कि 'हारुल' के माध्यम से सिर्फ जौनसार बावर के लोक नायक का इतिहास ही नहीं बल्कि वहाँ के आस्था के प्रतीक ईष्ट देवों, गाँव के सम्बन्धों और ऐतिहासिक घटनाओं को भी सैकड़ों वर्षों से संजोये व समेटे रखा है। मैंने यह भी महसूस किया कि 'हारुल' जौनसार बावर के इतिहास को एक रूपरेखा व ऐतिहासिक टुकड़ों को जोड़ने व जौनसार बावर की पौराणिक तस्वीर उभारने में सार्थक सिद्ध हुई है।
मेरे विचार में यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को जौनसार के पौराणिक इतिहास से अवगत कराता रहेगा। यह पुस्तक लेखक के कई वर्षों के गहन अध् ययन, क्षेत्र भ्रमण के दौरान असीमित लोगों से जानकारी एकत्र कर व उसके पश्चात गहन आत्मचिन्तन व मंथन के कारण ही सम्भव हो सका है।
मैं इस पुस्तक को श्री केशर सिंह राय द्वारा जौनसार बावर के लोगों के प्रति उनके प्रेम का एक अनूठा उपहार मानता हूँ। यह पुस्तक शोधकर्ताओं के लिए भी एक मार्गदर्शन व ज्ञानवर्धन का कार्य करेगी। मैं इनके प्रशंसनीय प्रयासों की सराहना करता हूँ और इसके प्रकाशन के लिए हार्दिक बधाईयाँ व शुभकामनाएं देता हूँ।
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