Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.

हिन्दी पत्रकारिता: Hindi Patrakarita (Approved Textbook for the Academic Year 2022-2023 in Compliance with the National Education Policy 2020)

£25
Inclusive of All Taxes
Specifications
Publisher: Rudra Publication, Delhi
Author Amit Kumar Singh, Krishna Pratap Singh
Language: Hindi
Pages: 163
Cover: HARDCOVER
9.0x6.6 Inch
Weight 350 gm
Edition: 2024
ISBN: 9788197057724
HCC249
Delivery and Return Policies
Usually ships in 3 days
Returns and Exchanges accepted within 7 days
Free Delivery
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.
Book Description

प्राक्कथन

     

 

जन-संवेदना के संचार का सर्वसुलभ प्रभावकारी जन माध्यम ही पत्रकारिता है। पत्रकारिता अभिव्यक्ति का सम्पूर्ण विज्ञान है, आदर्श कला है, उत्तम व्यवसाय है और मानव चेतना का का उद्दीपक है। युग बोध के प्रमुख तत्वों के साथ ही मानवता के विकास और विचारोत्तेजन का राजमार्ग ही पत्रकारिता है जिससे जन-जीवन पल-पल पर उद्वेलित होता रहता है। समाज, संस्कृति, साहित्य, दर्शन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रसार के चलते मानव-संघर्ष, क्रांति, प्रगति दुर्गति से प्रभावित जीवन सागर में उठने वाले ज्वार भाटा को दिग्दर्शन करने वाली पत्रकारिता अत्यन्त महत्वपूर्ण हो चुकी है। जनता, समाज, राष्ट्र और विश्व को गरीबी का भूगोल, पूँजीपतियों का अर्थशास्त्र और नेताओं का समाजशास्त्र पढ़ाने में पत्रकारिता ही सक्षम है। इस जीवंत विद्या से जन-जन के दुख-सुख, आशा-आकांक्षा को मुखरित किया जाता है। 'जीवनं सत्यशोधनम्' के अनुरूप पत्रकारिता जन-जन के चिन्तन तथा चरित्र को प्रभावित करने में अग्रगण्य है। पत्रकारिता जन-भावना की उद्घोषिका है। सभ्यता और स्वतंत्रता की वाणी होने के साथ ही वह विश्व में क्रांति की अग्रदूतिका है। चार विरोधी पत्र चार हजार संगीनों से अधिक घातक है जैसा कि अकबर इलाहाबादी का कथन है- खींचो न कमानों को न तलवार निकालो। जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो। पत्रकारिता लोकमानस के साथ प्रत्यक्ष संवाद का एक जीवंत रचनात्मक माध्यक है। युगबोध की अभिव्यक्ति, जनेचतना के प्रसार और बौद्धिक जागरण में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका आरम्भिक काल से ही स्वीकार की गयी है। हमेशा से पत्र-पत्रिकाएँ पाठकों को वैचारिक आयाम देती रही हैं, उनके बौद्धिक स्तर को विकसित करती रही है और समय की सही पहचान के लिए शिक्षित भी करती रही है। स्वतंत्रता पूर्व की हिन्दी पत्रकारिता का समूचा इतिहास इसकी पुष्टि करता है। जनभावना की अभिव्यक्ति, स्वाधीनता की पीठिका और सदभावों की प्रेरणामयी वाणी के कारण ही पत्रकारिता ने मानव जाति में क्रांति करके अनेक बार व्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव किये हैं। सामाजिक मुक्ति से राष्ट्रीय मुक्ति तक हिन्दी पत्रकारिता ने क्रमशः हम भारतीयों की चेतना का संस्कार और परिष्कार किया है, लोक शिक्षा को गत्वर बनाया है और अपनी भाषा में अपने और सम्पूर्ण काल और दिक् को मुक्ति का मार्ग सुझाया है। आज हिन्दी पत्रकारिता अपने गुणवत्ता, प्रसार, कला कौशल तथा तकनीकि सभी मामलों में विश्व की श्रेष्ठतम पत्रकारिता में सम्मिलित हो चुकी है। जहाँ पर पाश्चात्य पत्रकारिता अपने भौतिकता के कारण जानी जाती है वहीं हिन्दी पत्रकारिता उच्चकाटि के उदात्त मानवीय मूल्यों का पर्याय मानी जाती है। पत्रकारिता के इतिहास में हिन्दी साहित्यिक पत्रकारिता का हमेशा से विशिष्ट स्थान रहा है। यहाँ साहित्य की विविध विधाओं को विशेष प्रयोजन के साथ सशक्त अभिव्यक्ति दी जाती है। ये विधाएँ आलोचना, काव्य, कथा-साहित्य, नाट्य, निबंध, संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा, समकालीन साहित्य विमर्श, तुलनात्मक साहित्य तथा साहित्य-संस्कृति आदि पर केन्द्रित होती है। इन विधाओं को पत्र-पत्रिकाओं (मासिक, त्रैमासिक, अर्द्ध वार्षिक, वार्षिक) के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। जाहिर है इस प्रस्तुतिकरण के संयोजन व संपादन के लिए पत्रकारिता के माध्यम का सहारा लेना पड़ता है और इस प्रक्रिया के साथ ही साहित्यिक पत्रकारिता की शुरुआत समझी जा सकती है।

 

लेखक परिचय

 

नाम : डॉ. अमित कुमार सिंह जन्म : 27 अप्रैल, 1986, वाराणसी, उत्तर-प्रदेश शिक्षा 1. हाईस्कूल-2000 यू.पी. बोर्ड, गाजीपुर, उत्तर-प्रदेश 2. इण्टरमीडिएट-2002 यू.पी. बोर्ड, गाजीपुर, उत्तर-प्रदेश 3. बी.ए.-2006, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 4. एम.ए. (हिन्दी)-2008, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 5. पी-एच.डी.-2020, हिन्दी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली प्रकाशन : विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में दस से अधिक शोध-पत्र एवं पुस्तक अध्याय प्रकाशित। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों में सहभागिता । सम्प्रति: वर्तमान में स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर, उत्तर-प्रदेश में अध्यापन ।

 

नाम : डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह जन्म : 25 जुलाई 1979. आजमगढ़, उत्तर-प्रदेश शिक्षा 1. हाईस्कूल-1993 यू.पी. बोर्ड, अयोध्या धाम, उत्तर-प्रदेश 2. इण्टरमीडिएट-1995 यू.पी. बोर्ड, अयोध्या धाम, उत्तर-प्रदेश 3. बी.ए.-1998, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तर-प्रदेश 4. एम.ए. (हिन्दी)-2001, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तर-प्रदेश 5. पी-एच.डी.-2006, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तर-प्रदेश प्रकाशन : विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में दस से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों में सहभागिता । सम्प्रति : हिंदी विभागाध्यक्ष, खरडीहा महाविद्यालय, खरडीहा, गाजीपुर, उ.प्र.

 

पुस्तक परिचय

 

आज हिन्दी पत्रकारिता अपने गुणवत्ता, प्रसार, कला कौशल तथा तकनीकि सभी मामलों में विश्व की श्रेष्ठतम पत्रकारिता में सम्मिलित हो चुकी है। जहाँ पर पाश्चात्य पत्रकारिता अपने भौतिकता के कारण जानी जाती है वहीं हिन्दी पत्रकारिता उच्चकोटि के उदात्त मानवीय मूल्यों का पर्याय मानी जाती है। पत्रकारिता के इतिहास में हिन्दी साहित्यिक पत्रकारिता का हमेशा से विशिष्ट स्थान रहा है। यहाँ साहित्य की विविध विधाओं को विशेष प्रयोजन के साथ सशक्त अभिव्यक्ति दी जाती है। ये विधाएँ आलोचना, काव्य, कथा-साहित्य, नाट्य, निबंध, संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा, समकालीन साहित्य विमर्श, तुलनात्मक साहित्य तथा साहित्य-संस्कृति आदि पर केन्द्रित होती है। इन विधाओं को पत्र-पत्रिकाओं (मासिक, त्रैमासिक, अर्द्ध वार्षिक, वार्षिक) के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। जाहिर है इस प्रस्तुतिकरण के संयोजन व संपादन के लिए पत्रकारिता के माध्यम का सहारा लेना पड़ता है और इस प्रक्रिया के साथ ही साहित्यिक पत्रकारिता की शुरुआत समझी जा सकती है।

Frequently Asked Questions
  • Q. What locations do you deliver to ?
    A. Exotic India delivers orders to all countries having diplomatic relations with India.
  • Q. Do you offer free shipping ?
    A. Exotic India offers free shipping on all orders of value of $30 USD or more.
  • Q. Can I return the book?
    A. All returns must be postmarked within seven (7) days of the delivery date. All returned items must be in new and unused condition, with all original tags and labels attached. To know more please view our return policy
  • Q. Do you offer express shipping ?
    A. Yes, we do have a chargeable express shipping facility available. You can select express shipping while checking out on the website.
  • Q. I accidentally entered wrong delivery address, can I change the address ?
    A. Delivery addresses can only be changed only incase the order has not been shipped yet. Incase of an address change, you can reach us at help@exoticindia.com
  • Q. How do I track my order ?
    A. You can track your orders simply entering your order number through here or through your past orders if you are signed in on the website.
  • Q. How can I cancel an order ?
    A. An order can only be cancelled if it has not been shipped. To cancel an order, kindly reach out to us through help@exoticindia.com.
Add a review
Have A Question
By continuing, I agree to the Terms of Use and Privacy Policy
Book Categories