भूमिका
होमियोपैथी के आविष्कारक जर्मनी के डाक्टर सैमुएल हैनिमैन थे। हालांकि होमियोपैथी का आविष्कार हुए लगभग 250 वर्ष हो चुके हैं. फिर भी इस चिकित्सा पद्धति की लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। इस चिकित्सा पद्धति के लोकप्रिय होने के अनेक कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण यह है कि अन्य चिकित्सा पद्धतियों की अपेक्षा होमियोपैथी कम खर्चीली है। आज के डाक्टर मरीजों को बड़ी खर्चीली मेडिकल जाँच (टेस्ट) लिखते हैं. किन्तु इस चिकित्सा पद्धति में ऐसी जाँचों को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाता है। इसके अलावा इस पद्धति के अतिरिक्त परिणामों (साइड इफेक्ट्स) की सम्भावना भी नहीं के बराबर है। सुविधा और सुरक्षा की दृष्टि से होमियोपैथी एक साधारण आदमी के लिए अत्यन्त अनुकूल है. इतना ही नहीं तीव्र या शल्यचिकित्सकीय स्थितियों से बचने के लिए इस चिकित्सा पद्धति का उपयोग बड़ा ही उपयोगी माना गया है। होमियोपैथिक औषधियाँ सुरक्षित, सस्ती, व्याधिनाशक और आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ छोटे शिशुओं के लिए भी बड़ी ही प्रभावशाली है। इसमें एलोपैथिक दवाओं के विपरीत प्रभावों को भी ठीक करने की अद्भुत क्षमता है। होमियोपैथी का सम्बन्ध मनुष्य की आंतरिक शक्तियों से है। मनुष्य के स्थूल शरीर पर उसके विचारों, मनोभावों और अन्य सूक्ष्म तत्त्वों का भी बहुत प्रभाव पड़ता है, हमारे स्थूल शरीर में जो अस्वस्थता आती है, उसका सूत्रपात हमारे सूक्ष्म मन में होता है और रोग का आरम्भ स्थूल शरीर में ही नहीं बल्कि सूक्ष्म मन में तथा हमारी आंतरिक जीवनी शक्ति में भी होता है। इसी को आधार मानकर होमियोपैथी में सूक्ष्म औषधियों का भी प्रयोग किया जाता है, इसीलिए होमियोपैथी एलोपैथी की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली तरीके से काम करती है। होमियापैथी के बारे में यह भी जानना आवश्यक है कि यह चिकित्सा पद्धति एलोपैथी से पूर्णतः भिन्न है। इसे किसी भी प्रकार से एलोपैथी चिकित्सा के पूरक के रूप में नहीं देखना चाहिए। आज का मानव अनेक असाध्य औ। अनेक रोग बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं जिनका एलोपैथी के डाक्टरों के पास कोई कठिन रोगों से ग्रस्त है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, कैसर अस्थमा आदि निश्चित और स्थायी समाधान नहीं है। ऐसी स्थिति में होमियोपैथी चिकित्सा को उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। आज के प्रायः अधिकतर रोग तनाव जनित हैं। इन परिस्थितियों में मेरा मानना है कि होमियोपैथी चिकित्सा से इस दिशा में प्रयोग करने से अद्भुत परिणाम देखने को मिलेंगे। मैं स्वयं हीलिंग के क्षेत्र में वर्ष 1997 से कार्यरत हूँ तथा योग की भाँति होमियोचिकित्सा से भी मेरा बड़ा लगाव रहा है। में होमियोपैथी की दवाइयों का स्वतः प्रयोग करता आया हूँ और इसके परिणाम स्वयं देखे हैं। मैं अपने प्रिय होमियोपैथी के चिकित्सक डा. बन्सल. (सोनीपत) तथा डा. चन्द्रभूषण त्रिपाठी जी का बहुत ही आभारी हूँ, जो वर्षों से होमियोपैथी का इलाज करते आ रहे हैं तथा मेरा इस चिकित्सा पद्धति में मार्गदर्शन किया है। डा. कल्पना माथुर तथा डा. मधु त्रिपाठी जो होमियोपैथी चिकित्सा में बाल एवं स्त्री रोगों की विशेष चिकित्सिका हैं, मैं मार्गदर्शन हेतु उनका भी आभारी हूँ। मैंने 24 जून 2013 से 29 जून 2013 तक सोनीपत जिले में स्थित ओशाधारा केन्द्र में देश के जाने-माने होमियोपैथी के अनेक विशेषज्ञों के साथ होमियोप्रज्ञा कार्यक्रम सदगुरु ओशो सिद्धार्थ के सानिध्य में किया है, जिसमें मुझे इस चिकित्सा पद्धति के सम्बन्ध में अद्भुत ज्ञान प्राप्त हुआ है, मैं उनके प्रति भी आभार प्रकट करता हूँ।
पुस्तक परिचय
होमियोपैथी चिकित्सा आज की आधुनिक जोवनशैली जाने अनजाने कई रोगों को जन्म दे रही है, जिनमें मधुमेह, रक्तचाप, हृदयरोग, कैंसर आदि प्रमुख हैं। ये सभी तनाव जनित रोग हैं। जिन रोगों का स्थायी समाधान एलोपैथी में नहीं है, उसका समाधान होमियोपैथी के इलाज द्वारा संभव है। होमियोपैथी चिकित्सा अन्य चिकित्सा पद्धतियों की अपेक्षा कम खचाली और आसान है। सुविधा और सुरक्षा की दृष्टि से भी होमियोपैथी आम आदमी के लिए अनुकूल है। आज के डाक्टर मरीजों के इलाज में खर्चीले टेस्ट लिखते हैं, किन्तु होमियोपैथी चिकित्सा में ऐसी जाँचों को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाता है। इस पद्धति में साइड इफेक्ट्स की संभावना भी न के बराबर है। एलोपैथी में छोटे से छोटे इलाज भी महँगे और जटिल हैं। आप किसी भी अस्पताल में जायें, संतोषजनक उपचार के अभाव में आपको निराश होना पड़ सकता है, लेकिन होमियोपैथी के इलाज में सभी रोगों का उपचार कम खर्च में ही संभव है। प्रस्तुत पुस्तक में सर्दी-जुकाम, बुखार आदि से लेकर असाध्य रोगों के उपचार से सम्बन्धित होमियोपैथी के 77 प्रमुख औषधियों के विवरण सरल एवं आसान हिन्दी भाषा में दिये गये हैं। होमियोपैथी औषधि का प्रयोग बड़ों के साथ-साथ शिशुरोग के निदान में अत्यंत प्रभावशाली है। होमियोपैथी ने कई जटिल बीमारियों जैसे बवासीर, मस्से आदि रोगों में रोगियों को सर्जरी से स्थाई मुक्ति दे दी है। यह सभी इलाज अचूक तथा आजमाए हुए हैं। होमियोपैथी चिकित्सा के लेखक स्वामी आर. सी. शुक्ल की दो पुस्तकें 'Yogasanas and Pranayama' एवं 'Reiki and Alternative Therapies' हमारे प्रकाशन द्वारा पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है। जिसे पाठकों द्वारा भरपूर सराहना मिली हैं।
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