पुस्तक परिचय
हृदय रोग का नाम सुनते ही मानव के मन-मस्तिष्क में एक अघोषित-अप्रत्याशित भय बैठ जाता है। संसार में लाखों लोग आज हृदय रोग या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं। प्रायः सभी हृदय रोगों का कारण खानपान का असंयम, भावात्मक दबाव और व्यायाम-परिश्रम की कमी का होना है। व्यक्ति आज स्वादिष्ट भोजन खूब सारा खा तो लेता है लेकिन उसकी जठराग्नि (पाचनशक्ति) कमजोर होने के कारण वह उस भोजन को पूर्णतया पचा नहीं पाता। इसका परिणाम यह होता है कि भोजन का वसा वाला भाग व्यर्थ के मोटापे या चर्बी के रूप में जमा हो जाता है और कुछ लोगों में घातक कोलेस्ट्रॉल बनकर यह रक्त की धमनियों में जमा हो जाता है। हृदयक्षति और हृदयाघात जैसे रोग इन सब कारणों से ही होते हैं। पुस्तक में कई प्रकार के हृदय रोगों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। रोग की पहचान, निदान और चिकित्सा के सम्बंध में खुलकर चर्चा की गयी है। इस कृति को लिखने का उद्देश्य पाठकों को विभिन्न प्रकार के हृदय रोगों के बारे में आवश्यक जानकारियाँ प्रदान करना है ताकि उसे समझकर वे हृदय रोग की उत्पत्ति के संभावित कारणें से खुद को बचा सकें और यदि किसी को दुर्भाग्यवशः हृदय रोग हो जाए तो इस रोग की आवश्यक चिकित्सा का लाभ उठा सकें। यद्यपि हृदय रोग की पीड़ा से कुछ समय की निजात मरीज को प्राथमिक चिकित्सा सहायता के जरिए दिलाई जा सकती है लेकिन समय रहते यदि हृदय रोगी को अस्पताल अथवा डॉक्टर के पास ले जाया जाए, तो उसका इलाज बेहतर ढंग से हो सकता है।
Hindu (हिंदू धर्म) (13739)
Tantra (तन्त्र) (1004)
Vedas (वेद) (727)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2084)
Chaukhamba | चौखंबा (3180)
Jyotish (ज्योतिष) (1561)
Yoga (योग) (1169)
Ramayana (रामायण) (1334)
Gita Press (गीता प्रेस) (723)
Sahitya (साहित्य) (24809)
History (इतिहास) (9051)
Philosophy (दर्शन) (3634)
Santvani (सन्त वाणी) (2629)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist