You are viewing the Indian version of the website.
To be able to order, please click here for your region.
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.

इज्जत का सौदा- Ijjata Ka Sauda (Story Collection)

Rs.999
MRP
Inclusive of All Taxes
Specifications
Publisher: Satyam Publishing House, New Delhi
Author Naresh Kumar Udas
Language: Hindi
Pages: 330
Cover: HARDCOVER
9x6 inch
Weight 520 gm
Edition: 2025
ISBN: 9789359099965
HBI202
Statutory Information
Delivery and Return Policies
at  43215
Returns and Exchanges accepted within 7 days
Free Delivery
Delivery from: India
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.
Book Description

भूमिका

"इज्जत का सौदा" शीर्षक से मेरे इस कथासंग्रह में मेरी कुल ग्यारह कहानियाँ हैं। इन कहानियों का विषय मानव के किसी न किसी पहलू से अवश्य जुड़ा हुआ है। यह मेरा ग्यारवाँ कथासंग्रह है।

समय परिवर्तनशील है। यह हमेशा एक समान नही रहता, अपितु बदलता रहता है। समय की कोख में अतीत बनकर रह जाता है। जबकि नया हमारे सामने फिर आने लगता है। वर्तमान जीवन की धड़कने इन कहानियों में महसूसी जा सकती हैं। मैं ऐसा समझता हूँ। जीवन की कई घटनाओं से जुड़ी हैं यह कहानियाँ।

इन कहानियों में से दो तीन कहानियों को छोड़कर शेष सभी कहानियाँ नारी विमर्श की पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई हैं। मैंने लगभग अपनी समग्र कथाओं में नारी की वास्तविक स्थिति को दर्शाया है। जैसे परिवेश में वह जीती हैं, जैसा भोगती-सहती है। उनकी दशा क्या है समकालीन परिवेश में। इसे प्रकट करना चाहा है। उनका रहन-सहन जीवनयापन का स्तर कैसा है। उनकी पीड़ा-दशा जीवनशैली को कहानियों में पात्रों के माध्यम से वैसा ही दर्शाया है। इसमें उनकी वर्तमान स्थिति का सटीक उल्लेख आपको मिलेगा। उनकी सम्वेदनाएं-अनुभूतियाँ कहाँ-कहाँ छलनी हुई। उनकी झलक अवश्य इन कहानियों में आपको मिल जाएगी। यह मेरा दावा है आप से।

भले हम कितना कह लें। आजादी के बाद की नारी सभी क्षेत्रों में अग्रणी रही है। वह पहले जैसी स्थिति में अब नही है। किन्तु इस आधुनिक समाज की बदली परिस्थितियों में नारी ने क्या पाया है तथा क्या खोया है। यह प्रश्न विचारणीय है। इसे टाला नहीं जा सकता। इस बदले हुए परिवेश में इन परिस्थितियों में, कुछ ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिन से नारी जूझ रही है। संघर्षरत है। भले वह आर्थिक स्तर पर कुछ हद तक आत्मनिर्भर बन गई हो। चाहे उसका प्रतिशत कम ही है। फिर भी उसके दोयमदर्जे की छवि पूर्णयता खत्म नही हुई है।

नारी की इसी मानसिकता को लेकर मैंने इन कहानियों को बुना है। इन कहानियों की चुनाबट में उनकी इन्हीं मुद्दों पर (नारी विमर्श के ज्वलंत विषयों को) समेटा गया है। मैं हर कहानी का अंत सकारात्मक नही करता। कहानी की माँग पर आधारित रहता है। उसका अन्त। भले वह नकारात्मक हो। किन्तु उसमें बनावट नही, यथार्थ झलकना चाहिए। मैं पात्रों की सजीवता को साथ लेकर चलता हूँ। जैसा वह चाहते, महसूसते हैं। करते हैं तथा करते रहना चाहते हैं। मैं कदम-कदम पर उनके साथ चलता हूँ। उनकी बात मानता हूँ।

आज का युग अति आधुनिकता से परिपूर्ण है। इस वर्तमान युग में भौतिकतावाद, बाजारवाद का बोलवाला है। मानवीय सम्वेदनाओं का निरनतर हास हुआ है। आज मानव सुविधाओं का दास बन बैठा है। आर्थिक स्तर पर भले वह सुदृढ़ हो गया हो, लेकिन मानवीयता स्तर पर वह बहुत नीचे गिर चुका है। उसने छल-कपट मोहमाया तथा लालच के बल पर सब को छला है। अपना मान-सम्मान तथा स्वाभिमान बेचा है। क्या यह उसकी गिरवाट या पतन का द्योतक नही ?

आज हमारे नैतिक मूल्य आँसू बहा रहे हैं। वह औंधे मुँह पड़े हुए है। मैं यह नहीं कहता कि, सभी लोग नैतिक स्तर पर गिरे हुए हैं। अपवाद हर वस्तु-चीज या मानव का हमेशा होता है। कुछ अच्छे भी हैं। किन्तु ज्यादातर ऐसे नही हैं। इस इंटरनेट, टी.वी. के युग में हमारे बीच नकारात्मक प्रभाव ज्यादा बढ़े हैं। इसे हम झुठला नही सकते। युवा पीढ़ी मोबाईल के मोहपाश में जकड़ी पड़ी है।

आए दिन कुछ दिल दहलाने वाली घटनाएं हमारे सामने घटने लगी हैं। मानव खोखला होने लगा है। पूरा सम्वेदनहीन, पत्थर सा बन बैठा है। यह दौर तरक्की का भले दौर कहलाए। किन्तु यह दौर मानवीयता के क्षरण की पराकाष्टा का समय भी कहलाएगा ?

हमें अपने मानवीय मूल्यों को समय रहते बचाना होगा ? अन्यथा आदमी से आदमी का विश्वास ही उठ जाएगा। धरती पर झूठ का ताण्डव होगा। यह घोर कलयुग की शुरुआत है। जिसने हमारी कोमल सम्वेदनाओं अनुभूतियों को लील डाला है।

मैं यहाँ स्पष्ट कर दूँ। इस कथासंग्रह में मैंने शैलीगत् कोई नया प्रयोग नही किया ? कहानियों को कथानुसार सरल-सहज शब्दों में लिखा है ताकि एक अक्षरज्ञान प्राप्त मानव भी इसे पढ़कर कोई सबक ले सके।

मैंने अपने लेखन के पाँच दशकों मे साहित्य की कई विधाओं में साहित्य सृजन कर डाला। जिसमें कविता, कहानी, लघुकथा, उपन्यास, गीत, क्षणिका तथा बाल साहित्य भी है। मैंने 'नाटक' नही लिखे। संस्मरण, आत्मकथा भी लिखीं।

मेरी कहानियों-कविताओं पर छात्रों ने कुछ शोध एम.फिल. हेतु किये तथा दो शोधार्थी मेरी समग्र कहानियों पर पी.एच.डी हेतु शोधरत भी हैं।

मैं एक बात का उल्लेख यहाँ करना आवश्यक समझता हूँ। इन कहानियों को लगातार इतनी तेजी से लिखने के पीछे एक प्रेरणा निहित है। जिसके फलस्वरूप मैंने 2022 में इतनी कहानियाँ एक साथ लिख डाली। जितनी पिछले वर्षों में मैंने इतनी अधिक संख्या में नही लिखी थीं। कहते हैं कि इंसान को प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है। चाहे जिससे उसने प्रेरणा ली हो, वह व्यक्ति जिंदा हो या मृत।

Frequently Asked Questions
  • Q. Do you offer express shipping?
    A. Yes, we do have a chargeable 1-2 day delivery facility available for Indian pin codes. For express shipping, please reach out through help@exoticindia.com
  • Q. What locations do you deliver to?
    A. Exotic India delivers orders to all Indian pin codes and countries having diplomatic relations with India.
  • Q. Can I return the book?
    A. All returns must be postmarked within seven (7) days of the delivery date. All returned items must be in new and unused condition, with all original tags and labels attached. To know more please view our return policy.
  • Q. What is Handling & delivery charge?
    A. Handling and delivery charge is the sum of acquiring the book from the remote publisher to your doorstep.
  • Q. I accidentally entered wrong delivery address, can I change the address?
    A. Delivery addresses can only be changed only incase the order has not been shipped yet. In case of an address change, you can reach us at help@exoticindia.com
  • Q. How do I track my order?
    A. You can track your orders simply entering your order number through here or through your past orders if you are signed in on the website.
  • Q. How can I cancel an order?
    A. An order can only be cancelled if it has not been shipped. To cancel an order, kindly reach out to us through help@exoticindia.com.
Add a review
Have A Question
By continuing, I agree to the Terms of Use and Privacy Policy
Book Categories