द्वितीय संस्करण के सन्दर्भ में अपना मनोगत लिखते हुए अत्यन्त हर्ष हो रहा है। 2019 में जिस कार्य को सम्पूर्ण किया था आज उसी कार्य को एक नए आयाम तक ले जाने का अवसर इस पुस्तक के माध्यम से प्राप्त हो रहा है। इस पुस्तक के प्रथम संस्करण को चारों ने जो स्नेह दिया है, उसके लिये मैं उन्हें साधुवाद देता हूँ। प्रथम संस्करण के माध्यम से छारों में आयुर्वेद के भौतिक सिद्धान्तों का अध्ययन एवं उनके प्रति प्रयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया था और इसके लिए पुस्तक की सराहना भी हुई, जिसके लिए मैं आभारी हूँ।
हाल ही में भारतीय चिकित्सा प्रणाली के राष्ट्रीय आयोग (National Commission for Indian System of Medicine -NCISM) ने पदार्थ विज्ञान के पाठ्यक्रम में कुछ संशोधन किया है। इस विषय में क्रियात्मक को भी जोड़ा गया है। इस द्वितीय संस्करण के माध्यम से NCISM के पाठ्यक्रम के अनुसार आवश्यक विषयों की वृद्धि की गई है। प्रथम संस्करण में जो टंकण त्रुटियाँ रह गई थी, उन्हें भी दूर करने का यथासम्भव प्रयास किया गया है। कुछ नए उदाहरण, आरेख, चार्ट आदि भी जोड़ें गए हैं। समकालीन विज्ञान के सिद्धान्तों को भी यथास्थान उजागर किया गया है। कार्यकलाप या क्रियात्मक (Activity/Practicals) को कैसे करें यह भी उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। इस पुस्तक की विशेष उपलब्धि यह है कि, प्रथम बार वास्तविक कक्षा अध्ययन का अनुभव QR code के माध्यम से लाने का प्रयास किया गया है। पदार्थ विज्ञान के दुर्योध विषयों को वीडियो लेफार के माध्यम से समइवने का प्रागास इन QR code के माध्यम से किया गया है। आशा करता हूँ कि पुस्तक छात्रों के लिए उपयोगी होगी।
'सचित्र पदार्थ विज्ञान एवं आयुर्वेद का इतिहास' इस पुस्तक के माध्यम से डॉ. प्रबोध पेरावार ने एक युगानुरूप एवं लोकोपयोगी पुस्तक बनाने का सफल प्रयास किया है। उनका यह प्रयास अत्यन्त प्रशंसनीय है जिसके लिये वे अनेकानेक साधुवाद के पात्र हैं। प्रत्येक प्रकरण का वर्णन करते हुए उन्होंने परम्परागत, आयुर्वेद एवं आधुनिक विज्ञान के उदाहरणों का सहारा लिया है, जो इस पुस्तक को विशेष बनाता है। इस पुस्तक की दूसरी विशेषता यह है कि इसमें जिज्ञासु विद्यार्थियों के विस्तृत अध्ययन के लिये सन्दर्भों का संग्रह किया गया है।
विषय को चित्रों के माध्यम से स्पष्ट करने का लेखक का प्रयास प्रशंसनीय है। पुस्तक में पदार्थ विज्ञान जैसे अत्यन्त दुरुह विषय को सरलता से प्रस्तुत किया गया है। इसी क्रम में लेखक ने विषय को कई स्थानों पर वर्णन की सुगमता को दृष्टिगत रखते हुये अंग्रेजी के माध्यम से भी समइाने की कोशिश की है। विषय को विन्दुवार पद्धति से प्रस्तुत किया गया है, जो कि पुस्तक को बोधगम्य बनाता है।
'आयुर्वेद का इतिहास' विषय में लेखक ने अद्यतन उपलब्ध ज्ञान का वर्णन किया है। आयुर्वेद के इतिहास में आयुर्वेद के क्रमिक विकास के वर्णन के साथ-साथ वर्तमान काल में विश्व स्तर पर आयुर्वेद की स्थिति को भी प्रस्तुत करने का सफल प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
पुस्तक को पचासम्भव सरल, सरस एवं प्रवाहमयी रखने के प्रयास में लेखक को सफलता प्राप्त हुई है। पुस्तक का informative section इस पुस्तक की अनुपम विशेषता है। पुस्तक में वर्णित विषयों की अधाभिव्यक्ति पूर्णतया परिलक्षित है। विषयों का अर्थ करने में एक सहज सौख्य का अनुभव होता है।
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