लेखक परिचय
प्रदीप कुमार दूबे जन्मतिथि: 14 मार्च 1973 जन्म स्थानः ग्राम / पोष्ट-सुधाकला, जिला जौनपुर, उत्तर प्रदेश, शिक्षाः एम. ए. (हिंदी, संस्कृत, शिक्षा शार, इतिहास), श्री.एड., पी-एच.डी (हिंदी) पी-एस. डी. (हिंदी) उच्व शिक्षा एवं शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, धारवाड़ (2017) शोध प्रबंध का शीर्षक "रघुवीर सहाय का काष्य साहित्यः एक अनुशीलन" कार्यानुभवः 27 वर्ष, संस्कृत हिंदी भाषा शिक्षण, विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों (आज, चांयस अफि लखनऊ, लोक मित्र, तेजस टुडे) में संवाददाता के रूप में 12 वर्ष का कार्यानुभवः प्रकाशनः राष्ट्रीय / अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में शोध आलेख प्रकाशित व प्रकाशनाधीन । सहभागिताः राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सेमीनार सम्मेलनों में कई शोध आलेख प्रस्तुत । प्रकाशित पुस्तक जीवन तरंग (काव्य संग्रह) प्रकाशनाधीन पुस्तकें: ज्ञान सिन्धु जीवन रहस्य, मानस माहाय्य सम्मान एवं सदस्यता 'उ.प्र. साहित्य गौरव सम्मान-2022', विश्व हिंदी रचनाकार मंच (पंजीकृत न्यास), उत्तर प्रदेश। 'साहित्य श्री' एवं 'साहित्य शिरोमणि' सम्मान, अंतरराष्ट्रीय हिंदी सेवी संस्थान, प्रयागराज उत्तर प्रदेश। साहित्य शिखर सम्मान, विवेकानंद शैक्षणिक सांस्कृतिक संस्थान देवघर, झारखंड। भारत गौरव सम्मान, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार। स्थानीय संवाददाता, दैनिक' आज'। महसोल संवाददाता, हिंदी दैनिक 'वॉयस ऑफ लखनऊ'। विशेष संवाददाता हिंदी दैनिक 'तेजस टुडे'। जिला संत्राददाता हिंदी दैनिक चार्थ दर्पण'। प्रान्तीय प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ' स्थानः सुइचाकला, जौनपुर, उत्तर-प्रदेश संप्रतिः रामचरन सिंह इण्टर कॉलेज, रखनियाँ , सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत।
पुस्तक परिचय
कविक जीवन को कलात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करती है। मानवीयता को स्पर्श करने में कविता एक ऐसा माध्यम है जिसे आदिकवि ने सर्वप्रथम अपने मुख से प्रस्फुटित किया। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपने निबंध 'कविता क्या है?" में लिखा है "जिस प्रकार आत्मा को मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है। हृदय की इसी मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य को वाणी जी शब्द-विधान करती आई है, उसे कविता कहते हैं। इस. साधना को हम भावयोग कहते हैं और कर्मयोग और ज्ञानयोग का समकक्ष मानते हैं।" कवि डॉ. प्रदीप कुमार दुवे का काव्य संग्रह 'जीवन तरंग' की अपार सफलता के बाद 'जीवन उमंग' कविता संग्रह अपने नाम की सार्थकता को नया आयाम देता है। जीवन में उमंग का बने रहना सदा स्फूर्ति से भरा रखता है। गुलजार ने कहा है कि "कविता एक ऐसी नदी है जो दिल की गहराइयों से बहती है।" "जीवन उमंग' पुस्तक में आई कविताएँ इसी प्रवाह को बनाए हुए हैं। समाज में फैली अधाह पीड़ा, शोक, दुःख, करुणा को कवि अपनी संवेदना से बाँधने का प्रयास करने में पूर्ण सफल रहा है। इस संग्रह में सर्व प्रथम कवि ने अपने आराध्य पवन सुत हनुमान की स्तुति की है तत्पश्चात मानस महात्म्य', 'स्वार्थ सिद्धि' 'नारी धर्म', 'निंदा रस', 'गरीबी', 'बेटी', 'आज की मंथरा किसान' एवं 'टूटते रिश्ते 'आदि सामाजिक क्लीवता को उजागर करने के साथ ही प्रकृति को भ्रमित करने का जो मानव उपक्रम कर रहा है उसको अपनी कविता का विषय बनाया है।
Hindu (हिंदू धर्म) (13724)
Tantra (तन्त्र) (1005)
Vedas (वेद) (728)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2081)
Chaukhamba | चौखंबा (3180)
Jyotish (ज्योतिष) (1561)
Yoga (योग) (1168)
Ramayana (रामायण) (1334)
Gita Press (गीता प्रेस) (723)
Sahitya (साहित्य) (24773)
History (इतिहास) (9044)
Philosophy (दर्शन) (3634)
Santvani (सन्त वाणी) (2629)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist