पुस्तक-परिचय
प्रस्तुत पुस्तक के बारह संस्मरणात्मक आलेख हमारी जाग्रत अन्तर्वृत्तियों के जीवंत दस्तावेज हैं। निःसंदेह, महान विभूतियों की शुभकर, सुसंगत और सुचितित मनोधाराओं, उनके त्यागमय और संघर्षशील जीवन की गाथाओं, उनका स्वाभिमानी और चिंतनशील व्यक्तित्व तथा उनके द्वारा निर्देशित पथ के अनुकरण मात्र से हमारे जीवन की राहें निष्कंटक, सुगम और उन्नतशील हो जाती हैं। महान आत्माओं की सवृत्तियाँ। हमारे आभ्यन्तर में जीवनी शक्ति का अवबोध कराकर हममें साहस, धैर्य और मानवीय मूल्यों का अबाध संबार करती हैं। इसके साथ-ही-साथ जीवन जीने और संघर्षरत रहकर उसे उदात्त, श्रेष्ठ और उत्तमोत्तम बनाने की आकांक्षा भी उत्पन्न करती हैं। पुस्तक के सम्पूर्ण आलेखों को तीन कोटियों में रखकर देखा जा सकता है। प्रथम कोटि में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध शिक्षाशास्त्रियों, विद्वानों और साहित्यकारों पर आधारित आठ आलेख हैं। दूसरे भाग में विदेशों से आये हुए परमार्थ साधक मिशनरियों से जुड़े हुए तीन आलेख हैं, जिन्होंने समर्पित भाव से संत्रस्त, पीड़ित और वंचित मानवता की अनवरत सेवा की है। अंतिम आलेख गार्हस्थ्य जीवन से जुड़ा हुआ है, जिसमें 'बाबा' के घर के रख-रखाव, रुतबा और मालिकाना प्रभाव का अंकन इस दृष्टि से किया गया है कि घर-गृहस्थी के संचालन के निमित्त शासन अनुशासन और संयमित जीवन तथा निःस्वार्थ प्रवृत्ति का होना अत्यावश्यक है। हिसाबी और हथ-चिपक जीवन भी अभिनंदनीय और वरेण्य है। बड़े-बुजुर्गों के अनुभवजन्य विचारों ने हमें जिस पथ से अभिगमन करने का संदेश-निर्देश दिया है, वही स्तुत्प और अभिप्रेरक है। सच है कि मानव-जीवन त्याग, तपस्या, समर्पण सदाशयता और संत हृदय की साधुता की गरिमा महि के लगातार अभिमंडन से ही उच्चस्थ और समुज्ज्वल क माता है। पुस्तक के सम्पूर्ण आलेख हमारे भीतर के सुभा मानुष-भाव को जगाकर हमें सचेतन और संस्कारशील बनाने में समर्थ हैं। संस्कारशीलता मानव जीवन की अनमोल धरोहर है।
लेखक परिचय
डॉ॰ नागेश्वर सिंह जन्म-तिथि: 04 नवम्बर, 1947 शिक्षा : एम. ए. हिन्दी (1970), पीएच. डी. (1981), डी. लिट् (2001), राँची विश्वविद्यालय, राँची। लेखन : सात शोध-पुस्तकें तथा छह सम्पादित पुस्तकें प्रकाशित। सम्पादन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन और सह-सम्पादन। सेवा : पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची। पैंतीस वर्षों की अनवरत सेवा के पश्चात् 2009 में अवकाश प्राप्त। शोध निर्देशन : चालीस शोध-प्रज्ञों को पीएच.डी. और डी. लिट्. की उपाधि प्राप्त। आलेख : देश की विभिन्न प्रतिष्ठित हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक आलेख और समीक्षा प्रकाशित तथा आकाशवाणी एवं दूरदर्शन, राँची से अनेक वार्ताएँ प्रसारित। सम्मान : हिन्दी साहित्य की समृद्धि में उल्लेखनीय योगदान के लिए 14 सितम्बर, 2013 को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग, झारखण्ड, राँची द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर सम्मानित।
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