पुस्तक परिचय
भगवान महावीर का अहिंसा सिद्धांत व्रत महाव्रत नियम-संयम मर्यादा के आदर्शों में ही सिमटा न रहे बल्कि जन जन की जीवन शैली का अंग बने एतदर्थ पूज्यपाद साध्वी युगल निधि कृपा श्री जी ने 'जियो और जीने दो : अहिंसा संहिता' की संजीवनी को संस्तुत किया है। प्रत्येक मानव अपने को जाने अपने समान सबको माने इसके लिए पूज्या साध्वी युगल ने TED के माध्यम से 'अहिंसा संहिता' का ऐसा डिजाईन निर्मित किया है जिसमें वाचकों के T=THOUGHT E=EMOTION D=DEED अवश्य अहिंसामयी होंगे एवं जियो और जीने दो की टेकनिक अपनायेंगे, ऐसे आत्मविश्वास के साथ..
हर जीव, जीना चाहता है, हर मानव, खुश रहना चाहता है, हर इन्सान, शांति से जीना चाहता है, "जीते रहो" के आशीष से, हम हर्षित होते हैं। हिंसा के अभाव में, होती है ऐसी पूर्णता, जब आत्म-रक्षण की हो स्वतंत्रता, तब आनंद का स्रोत है बहता, और अभय का हाथ, बनता अहिंसा। अहिंसा सिद्धांत है जिनेश्वर प्रभु की अतुल्य देन, जिसमें संजोया है, साध्वी युगल का अनमोल प्रेम, जिन्होंने परोसा, “जियो और जीने दो" की अमूल्य भेंट, क्योंकि बिना अहिंसा के, कैसे बनायेंगे मानव जीवन को श्रेष्ठ?
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