भाषा विभाग, पंजाब ने सर्वोत्तम पंजाबी रचनाओं का हिन्दी में और हिन्दी की उत्कृष्ट पुस्तकों का पंजाबी में अनुवाद करने की विस्तृत योजना तैयार कर रखी है जिसका उद्देश्य हिन्दी एवं पंजाबी साहित्य को समृद्ध करना है। हिन्दी-पंजाबी भाषा-भाषियों में भावनात्मक एकता का संचार करने के लिए भी ऐसे साहित्यिक प्रयत्न लाभदायक सिद्ध होंगे। इस योजना के अन्तर्गत अब तक कइ प्रसिद्ध साहित्यकारों यथा यशपाल, भगवती चरण वर्मा, अश्क, वृन्दावन लाल वर्मा, मोहन राकेश इत्यादि (हिन्दी) और गुरबख्श सिंह प्रीत लड़ी, कुलवन्त सिह विर्क, सुजान सिह, लाल सिंह कमला अकाली, नवतेज सिंह, डा. हरचरण सिप आदि साहित्यकारों की साहित्यिक कृतियों का अनुबाद किया जा चुका है।
पंजाबी के प्रसिद्ध नाटककार गुरदयाल सिंह फुल्ल की प्रस्तुत रचना 'कलजुग रयु अगनि का' से पूर्व हम 'सभ किछु होति उपाइ' भी प्रकाशित कर चुके है। लेखक ने 'रथु अग्नि' के रूपक के माध्यम से संसार में व्याप्त लोभके भयावने रूप को नाटक का विषश बनाया है। इसी मृग-तृष्णा का पीछा करता हुआ मनुष्य अपना तो अनिष्ट करता ही है, वह उन लोगों के यिए भी कांटे बीजता चला जाता है, जिसके संसर्ग में वह आता है। याया का लोभकभी दहेज का रूप धारण कर लेता है। दहेज की बलि वेदी पर इस नाटक की नायिका की आहुति दी गई है और फिर हत्याओं का कुचक्र चल पड़ता है। मृगतृष्णा को छोड़ जब तक मनुष्य सद्वृत्तियों और अध्यात्मिकता का दामन नहीं थामता, तब तक वह शान्ति और मुक्ति को प्राप्त नहीं कर सकता। इस काव्य नाटक की भाषा बहुत ही प्रवाहपूर्ण और भावपूर्ण है।
डा० मनमोहन सहगल ने इस नाटक का अनुवाद किया है और श्री प्रेम मूषण गोयल ने इसका सम्पादन किया है। मुझे विश्वास है कि हिन्दी पाठक इस नाटक का भव्य स्वागत करेंगे ।
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