लेखक परिचय
वर्तमान में मोहित कुलश्रेष्ठ भारत संचार निगम लिमिटेड में उप मण्डल अभियन्ता के पद पर कार्यरत हैं। आप हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में समान रूप से स्वतंत्र लेखन करते हैं। युवा कवि एवं चिन्तक तो हैं ही, साथ ही चेतना विज्ञान पर आपका विशद अध्ययन है। इसके अतिरिक्त 'गीता' एवं संत कबीर पर स्वतंत्र रूप से शोध कार्य एवं लेखन कर रहे हैं। 'गीता में यज्ञ से सम्बन्धित धारणा' एवं 'गीता पर अभिप्रेरणा सिद्धान्त के अनुसार कुछ विचार' इस पर आपके आलेख देश की स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। कवि-हृदय एवं निरभिमानी मोहित कुलश्रेष्ठ में साहित्यिक उदात्तता के साथ संवेदना का ममत्व भी है।
पुस्तक परिचय
दीप्ति के कथा साहित्य में लौकिक प्रेम की तीव्रता चेतनता की अनुभूति से सम्मिश्रित हुई है तो कहीं सांकेतिक दाम्पत्य भाव-सूत्र में बाँधकर एक निराले स्नेह-सम्बन्ध की सृष्टि कर डाली है, जो प्रेमी के हृदय को आलम्बन दे सका, उसे पार्थिव प्रेम से ऊपर उठा सका, सोच-विचार को हृदयंगम कर सका और उनकी ऐसी अनुभूतियों में मानवीय संवेदना अधिक व्यक्त हुई है। उन्होंने अपनी मानवीय प्रेमानुभूति और उससे उत्पन्न वेदना व निराशा के चित्रण अपनी रचनाओं में किए हैं। ऐसे चित्रणों में जीवन में दुःख भोग रहे तथा तापित-शापित और व्यथित व्यक्तियों की व्यथा है। उन्होंने इसे केवल भावात्मक भूमि पर ही प्रस्तुत नहीं किया है, अपितु बौद्धिक भूमिका भी प्रदान की है। कथा-साहित्य में कहीं-कहीं मनुष्य का चिर-प्रसुप्त चेतन एक साथ एक ठेस खाकर विद्रोह कर उठता है। यह विद्रोह सर्वकालीन एवं सार्वदेशिक है।
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