लेखक परिचय
डॉ. ज्ञानराज काशीनाथ गायकवाड 'राजवंश' एम.ए.पीएच.डी. संभव है कि पढ़ने की क्रिया के द्वारा इस कविता संग्रह की कविताओं का आस्वादन करते समय पाठक रूपी रसिक अर्थात् सहृदय को लगता रहेगा कि ये कविताएँ तो अपनी ही हैं। क्योंकि कभी-कभी प्रसंगवश अपने को जो कुछ ऐसा लगने लगता है, जिसे अपना मन शब्दों के माध्यम से व्यक्त करना चाहता रहता है, वही तो कविता के रूप में इस कविता संग्रह की कविताओं में अभिव्यक्त हुआ है। अतएव ये कविताएँ अपनी ही हैं। साथ ही साथ उन कविताओं का आस्वादन करते समय सहृदय को ऐसा भी लगता रहेगा कि ये कविताएँ अपने प्रभावी आशय से तथा अपनी आनन्ददायक कलात्मकता से मन को रमानेवाली हैं. इसलिए ये कविताएँ रमणीय हैं और मन को जीवन के विषय में उपयुक्त विचार करने के लिए प्रेरित करनेवाली हैं, इसलिए वे कविताएँ मननीय भी हैं!
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