हरियाणा की साहित्यिक परंपरा सरस्वती नदी के किनारे वेदों की रचना से प्रारंभहोकर महर्षि वेदव्यास, संतकवि सूरदास, पंडित लखमीचंद, हाली पानीपती और बाबा फरीद के मार्गदर्शन को समाहित करती हुई वर्तमान रचना धर्मिता तक पहुँची है।
प्रदेश की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करने, साहित्यिक परिवेश का निर्माण करने तथा लेखकों को प्रोत्साहित करने हेतु हरियाणा सरकार द्वारा संस्थापित हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला द्वारा विभिन्न साहित्यक योजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं। इन योजनाओं में हिंदी तथा हरियाणवी प्रकोष्ठ के अंतर्गत दोनों भाषाओं में साहित्यकार अभिनंदन, श्रेष्ठ कृति पुरस्कार, अंग्रेजी श्रेष्ठ कृति पुरस्कार, हिंदी व हरियाणवी कहानी, नाटक एवं निबंध प्रतियोगिता आदि के साथ पुस्तक प्रकाशनार्थ प्रोत्साहन योजना भी सम्मिलित है। हरियाणा राज्य के जो लेखक हिंदी एवं हरियाणवी में साहित्य रचना करते हैं, उन्हें अपनी अप्रकाशित पुस्तकों के प्रकाशन के लिए पुस्तक प्रकाशनार्थ प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है ताकि उनकी रचनाएँ पाठकों तक पहुँच सकें।
मुझे हार्दिक प्रसन्नता है कि श्रीमती डॉ. नीरू मित्तल 'नीर' की 'एक सीढ़ी आसमान तक' शीर्षक पुस्तक का प्रकाशन अकादमी की पुस्तक प्रकाशनार्थ प्रोत्साहन योजना वर्ष 2022 के अंतर्गत किया जा रहा है। आशा है सुधी पाठकों द्वारा लेखिका के इस सफल प्रयास का स्वागत किया जाएगा।
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