पुस्तक परिचय
मानक भोजपुरी भारत एक विशाल राष्ट्र है जिसमें सामाजिक एवम् सांस्कृतिक विविधता है। विविध भाषाओं के विशाल राष्ट्र में हिंदी भाषा का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है एवंम् इसका प्रभाव सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है। ज्ञान-विज्ञान की विविध शाखाओं के अनुसंधाताओं एवम् विद्वानों ने हिंदी भाषा की विविध बोलियों एवम् विविधताओं का अध्ययन एवम् अनुसंधान किया है। इसी श्रृंखला में डॉ. देवेन्द्र प्रसाद सिंह ने मानकं भोजपुरी का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन किया है। जिसमें भोजपुरी के मानक स्वरूप के ध्वनि समूह, संज्ञा, लिंग, वचन, विशेषण सर्वनाम, परसर्ग, किया अव्यय, उपसर्ग, वाक्य-विन्यास, काव्यानुवाद, कथानुवाद के आधार पर अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। प्रत्यय, सम्पूर्ण अध्ययन सर्वथा मौलिक है तथा मेरा विश्वास है कि यह ग्रंथ अनुसंधान के नूतन आयामों का उन्मेष करेगा ! भोजपुरी एवम् भाषा विज्ञान के अध्ययन में रूचि रखने वाले प्राध्यापकों एवम् अनुसंधान के अनुरागियो हेतु यह ग्रंथ सर्वथा उपयोगी है अध्ययन योग्य है तथा संग्रहणीय है। डॉ. देवेन्द्र प्रसाद सिंह का यह श्रम उन्हें यश प्रदान करे, इसी मंगल कामना के साथ--
प्राक्कथन
जिस तरह कोई भी व्यक्ति अपने दहीं को खट्टा नहीं कहता, ठीक यही हाल भाषाओं के साथ भी हुआ करता है। अपनी बोली या भाषा सबको प्यारी लगती है क्योंकि जन्म के बाद से देखते-सुनते उस भाषा के शब्द परिचित होकर व्यक्ति के आचार-विचार में इस तरह घुल जाते हैं जिसे कभी निकाला नहीं जा सकता। इस तरह उसके भीतर शब्दों एवं वाक्यों की जो परत जम जाती है वह स्थायी बन जाती है। बाद में हम चाहे जितनी भाषाओं का अभ्यास करके सीखते हैं वह मातृभाषा का रुप नहीं ले सकतीं। शासन या अन्य किन्हीं कारणों से जब हम दूसरी भाषा व्यवहृत करते हैं उस समय भी बोलचाल एवं लेखन दोनों में बाल्यकाल की शब्दावली अनायास व्यक्त होती चलती है। जिस किसी सजींव भाषा का भौगोलिक विस्तार बहुत दूर तक फैला हुआ हो उसके बोलनेवाले काफी संख्या में मौजूद हो, ऐसी स्थिति में यह कहना कि अमुक अंचल-विशेष की भाषा परिनिष्ठित है बाकीं क्षेत्रों की भाषा संस्कृत नहीं है ऐसा दावे के साथ कहना थोड़ा कठिन है क्योंकि इससे नया विवाद खड़ा हो सकता है किसी का मुँह लटक सकता है। खैर ! मैंने इस पुस्तक के सृजन के लिए भोजपुर, जिसके आधार पर भोजपुरी भाषा का नामकरण हुआ है उसके आसपास के अंचलों को आधार बनाया है जहाँ भोजपुरी सघन रुप में बोली जाती है। भाषा की दृष्टि से भौगोलिक सीमाओं पर विचार करने से हम पाते हैं कि भोजपुर के दक्षिण-पूर्व में सोन नदी भोजपुरी को घेरने का काम करती है। उसके पश्चिम या उत्तरी तट का निवासी भोजपुरी बोलता है, पूर्वी या सोन के उस पार मगही बोली जाती है। दक्षिण में कैमूर पहाड़ी पूर्व से पश्चिम की ओर फैली हुई है यह भी आगे बढ़कर भोजपुरी की सीमा निर्धारित करती है। पश्चिमोत्तर अंचल ऐसा है प्रदेश के लोग कई राज्यों में फैले हुए हैं। इसके अतिरिक्त, मॉरिशस, फीजी, सूरीनाम, त्रिनिडाड आदि देशों में भी यह भाषा काफी संख्या में व्यवहृत हो रही है। आज बिहार, उत्तरप्रदेश एवं मॉरिशस में भोजपुरी पाठ्यक्रम में शामिल है। माध्यमिक स्तर से स्नातकोत्तर स्तर तक इस भाषा में अध्ययन-अध्यापन किया जा रहा है। इसके अलावा भोजपुरी में भी अन्य भाषाओं की तरह साहित्य की अनेक विधाओं में उत्कृष्ट कोटि की रचनाएँ लिखी जा रही है। चार कोस पर पानी बदले आठ कोस पर बानी' के हिसाब से विचार करने पर भेदक तत्वों के अनुसार इस अंचल की भोजपुरी के तीन रूप उपलब्ध हैं। पूर्वी उत्तरी भाग जिसमें बड़हरा, संदेश, बिहियाँ, बक्सर, इटाढ़ी, सिमरी, डुमराँव, विक्रमगंज, दावथ, दिनारा, डिहरी, तिलौथू, सासाराम, चोनारी, कुदरा तथा रामगढ़ का पूर्वी भाग आता है की भोजपुरी-बोलचाल में आपसी समानता मिलती है है। भोजपुरी का दूसरा रूप पचिश्मी अंचल में भभुआ, मोहनियाँ, दुर्गावती, रामगढ़, चाँद, चैनपुर, भगवानपुर और अधौरा प्रखंडों में मिलता है। दक्षिणी पूर्वी अंचल के रोहतास, नौहट्टा की भोजपुरी पर मगही का स्पष्ट प्रभाव है। यह पुस्तक दस अध्यायों में विभक्त है। पहले अध्याय में वाक्यानुवादों एवं कथानुवाद के आधार पर भोजपुरी का ध्वन्यात्मक विश्लेषण किया गया है। इसके मूल स्वर-ध्वनियों में अक दो, आ (आय) के दो, इ के तीन, उ के चार, ए के दो और संयुक्त ध्वनियाँ ऐ (अए, अइ) के दो और औ के (अय) एक विकल्प लक्ष्य किये गए हैं। (अय) और (आय) पश्चिमी अंचल में व्यवहृत विशेष ध्वनि घटक हैं, जो इस भाषा की विशिष्ट ध्वनि प्रक्रिया को सूचित करते हैं। व्यंजनों के विवेचन के कम में यह स्पष्ट किया गया कि "ण" का प्रयोग नहीं ह
Hindu (हिंदू धर्म) (13690)
Tantra (तन्त्र) (1006)
Vedas (वेद) (728)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2084)
Chaukhamba | चौखंबा (3180)
Jyotish (ज्योतिष) (1563)
Yoga (योग) (1166)
Ramayana (रामायण) (1335)
Gita Press (गीता प्रेस) (724)
Sahitya (साहित्य) (24738)
History (इतिहास) (9038)
Philosophy (दर्शन) (3633)
Santvani (सन्त वाणी) (2631)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist