मंत्र मंदाकिनी: Mantra Mandakini

मंत्र मंदाकिनी: Mantra Mandakini

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Author: मृदुला त्रिवेदी और टी.पी. त्रिवेदी (Mridula Trivedi And T.P.Trivedi)
Publisher: Alpha Publications
Language: Sanskrit Text With Hindi Translation
Edition: 2019
Pages: 438
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 570 gm

ग्रन्थ-परिचय

चयनित मंत्र संग्रह की सुरूचिपूर्ण एवं समस्त प्रयोजनों तथा अभीष्टों की संसिद्धि करने वाली सर्वोपयोगी व्यवस्था है मंत्र मंदाकिनी, जो मंत्र सम्बन्धी अन्यान्य भ्रम व भ्रांतियों का सबल समाधान प्रस्तुत करने वाला, पाठकों और साधकों के कल्याणार्थ परमपावन चरणामृत है जिसमें समस्त समस्याओं से सम्बन्धित सुगम समाधान सन्निहित हैं । उपयुक्त एवं त्वरित फलप्रदाता अनुकूल मंत्र चयन से सम्बन्धित समस्याओं के सुगम समाधान हेतु सामान्य साधनाओं का संगम एवं अन्यान्य पाठकों के स्वप्नों का सहज और साकार आकार है मंत्र मंदाकिनी, जिसमें वैवाहिक विलम्ब. वैवाहिक विसगतिया मंगली दोष के संत्रास, वट वृक्ष विवाह प्रविधि के अतिरिक्त संतति ' सुख, व्यावसायिक उन्नति, आर्थिक विकास और विस्तार, कार्यो की संपन्नता में अवरोध, कालसर्प योग, केमदुम योग, सकट योग एवं असाध्य व्याधि आदि के शमन, महिमामयी मानस मंत्र साधना तथा सुगम सांकेतिक साधना आदि का सुरूचिपूर्ण समावेश सन्निहित है।

लेखकद्वय ने 78 वृहद शोध प्रबन्धों की संरचना करने के उपरान्त, एक अत्यन्त सर्वसुलभ, सर्वोपयोगी सुगम एवं संक्षिप्त संरचना संपन्न करने का स्वप्न साकार किया, जो सामान्य पाठकों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे तथा उसमें समग्र समस्याओं के सविधि समाधान का सहज एवं-सीधा साधन उपलब्ध हो, ताकि विविध समस्याओं से आक्रांत व्यक्तियों की मनोकामनाओं की ३ संसिद्धि हेतु अन्यान्य ज्योतिषियों की चरण-रज की प्रतीक्षा में समय एवं धन नष्ट न हो ।

मंत्र मंदाकिनी में समस्त सामान्य समस्याओं के सुगम समाधान का शास्त्रसंगत उल्लेख किया गया है जिसमें शताधिक मंत्रों में से, स्वयं के लिए अनुकूल मंत्र चयन की दुष्कर प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती । प्रत्येक अभीष्ट की संसिद्धि हेतु पूर्ण परिहार प्रदान करने हेतु पृथक्-पृथक् परामर्श प्रपत्र का प्रबल पथ मंत्र मंदाकिनी में प्रस्तुत किया गया है । ये सभी परिहार, अनुष्ठान अथवा प्रयोग दीर्घकाल से लेखकद्वय द्वारा परीक्षित हैं तथा सहस्राधिक अवसरों पर अभिशसित प्रशंसित और चर्चित हुए हैं जिनसे प्राप्त परिणाम के प्रमाण और परिमाण से साधक व पाठकगण निरन्तर प्रेरित, आनन्दित, आहलादित, हर्षित और उल्लसित हुए हैं ।

मंत्र मंदाकिनी अग्रांकित 19 अध्यायों में विभाजित है जिनमें मंत्र शक्ति के अद्भुत प्रभाव का सुन्दर समन्वय प्रस्तुत किया गया है-1 मंत्र: वैज्ञानिक व्याख्या; 2. मंत्र विज्ञान: विविध विधान, 3. ग्रह शान्ति; 4. विवाह सम्बन्धी समस्याएँ एवं समाधान; 5. संतति सुख: परिहार परिशान, 6. निकृष्ट ग्रह योग कृत अवरोध शमन; 7. प्रचुर धनप्रदाता अनुभूत साधनाएँ; 8. शत्रु शमन तथा प्रतिद्वंदी दमन; 9. व्याधि शमन: स्वास्थ्यवर्द्धन; 10. परीक्षा तथा प्रतियोगिता में श्रेष्ठ सफलता; 11.समस्त बाधाओं को निर्मूल करके मनोकामना की संपूर्ति, 12. वांछित पदोन्नति प्राप्ति; 18. विस्तृत 'तत विधान; 14. दान अनुष्ठान: श्रेष्ठ परिहार प्रावधान, 15. श्रीदुर्गासप्तशती सन्निहित आराधनाएँ अभीष्ट संसिद्धि हेतु साधनाएँ, 16. अन्यान्य समस्याओं के समाधान हेतु संक्षिप्त एवं सुगम सांकेतिक साधनाएँ; 17. सुखद दाम्पत्य हेतु सुगम सांकेतिक साधनाएँ;

18. मानस मंत्र साधना, 19. षट्कर्म प्रयोग। ज्योतिष एवं मंत्र विज्ञान के गूढ़ रहस्य के सम्यक् संज्ञान हेतु समस्त ज्योतिष प्रेमी एवं मंत्र अध्येताओं के अध्ययन व अनुसंधान के निमित्त मंत्र मंदाकिनी एक अमूल्य निधि है।

संक्षिप्त परिचय

श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश की प्रथम पक्ति के ज्योतिषशास्त्र के अध्येताओं एव शोधकर्ताओ में प्रशंसित एवं चर्चित हैं। उन्होने ज्योतिष ज्ञान के असीम सागर के जटिल गर्भ में प्रतिष्ठित अनेक अनमोल रत्न अन्वेषित कर, उन्हें वर्तमान मानवीय संदर्भो के अनुरूप संस्कारित तथा विभिन्न धरातलों पर उन्हें परीक्षित और प्रमाणित करने के पश्चात जिज्ञासु छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करने का सशक्त प्रयास तथा परिश्रम किया है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने देशव्यापी विभिन्न प्रतिष्ठित एव प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओ मे प्रकाशित शोधपरक लेखो के अतिरिक्त से भी अधिक वृहद शोध प्रबन्धों की सरचना की, जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि, प्रशंसा, अभिशंसा कीर्ति और यश उपलव्य हुआ है जिनके अन्यान्य परिवर्द्धित सस्करण, उनकी लोकप्रियता और विषयवस्तु की सारगर्भिता का प्रमाण हैं।

ज्योतिर्विद श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश के अनेक संस्थानो द्वारा प्रशंसित और सम्मानित हुई हैं जिन्हें 'वर्ल्ड डेवलपमेन्ट पार्लियामेन्ट' द्वारा 'डाक्टर ऑफ एस्ट्रोलॉजी' तथा प्लेनेट्स एण्ड फोरकास्ट द्वारा देश के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्विद' तथा 'सर्वश्रेष्ठ लेखक' का पुरस्कार एव 'ज्योतिष महर्षि' की उपाधि आदि प्राप्त हुए हैं। 'अध्यात्म एवं ज्योतिष शोध सस्थान, लखनऊ' तथा 'द टाइम्स ऑफ एस्ट्रोलॉजी, दिल्ली' द्वारा उन्हे विविध अवसरो पर ज्योतिष पाराशर, ज्योतिष वेदव्यास ज्योतिष वराहमिहिर, ज्योतिष मार्तण्ड, ज्योतिष भूषण, भाग्य विद्ममणि ज्योतिर्विद्यावारिधि ज्योतिष बृहस्पति, ज्योतिष भानु एव ज्योतिष ब्रह्मर्षि ऐसी अन्यान्य अप्रतिम मानक उपाधियों से अलकृत किया गया है।

श्रीमती मृदुला त्रिवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालय की परास्नातक हैं तथा विगत 40 वर्षों से अनवरत ज्योतिष विज्ञान तथा मंत्रशास्त्र के उत्थान तथा अनुसधान मे सलग्न हैं। भारतवर्ष के साथ-साथ विश्व के विभिन्न देशों के निवासी उनसे समय-समय पर ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त करते रहते हैं। श्रीमती मृदुला त्रिवेदी को ज्योतिष विज्ञान की शोध संदर्भित मौन साधिका एवं ज्योतिष ज्ञान के प्रति सरस्वत संकल्प से संयुत्त? समर्पित ज्योतिर्विद के रूप में प्रकाशित किया गया है और वह अनेक पत्र-पत्रिकाओं में सह-संपादिका के रूप मे कार्यरत रही हैं। संक्षिप्त परिचय

श्री.टी.पी त्रिवेदी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से बी एससी. के उपरान्त इजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की एवं जीवनयापन हेतु उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद मे सिविल इंजीनियर के पद पर कार्यरत होने के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना की जागृति तथा ज्योतिष और मंत्रशास्त्र के गहन अध्ययन, अनुभव और अनुसंधान को ही अपने जीवन का लक्ष्य माना तथा इस समर्पित साधना के फलस्वरूप विगत 40 वर्षों में उन्होंने 460 से अधिक शोधपरक लेखों और 80 शोध प्रबन्धों की संरचना कर ज्योतिष शास्त्र के अक्षुण्ण कोष को अधिक समृद्ध करने का श्रेय अर्जित किया है और देश-विदेश के जनमानस मे अपने पथीकृत कृतित्व से इस मानवीय विषय के प्रति विश्वास और आस्था का निरन्तर विस्तार और प्रसार किया है।

ज्योतिष विज्ञान की लोकप्रियता सार्वभौमिकता सारगर्भिता और अपार उपयोगिता के विकास के उद्देश्य से हिन्दुस्तान टाईम्स मे दो वर्षो से भी अधिक समय तक प्रति सप्ताह ज्योतिष पर उनकी लेख-सुखला प्रकाशित होती रही । उनकी यशोकीर्ति के कुछ उदाहरण हैं-

देश के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्विद और सर्वश्रेष्ठ लेखक का सम्मान एव पुरस्कार वर्ष 2007, प्लेनेट्स एण्ड फोरकास्ट तथा भाग्यलिपि उडीसा द्वारा 'कान्ति बनर्जी सम्मान' वर्ष 2007, महाकवि गोपालदास नीरज फाउण्डेशन ट्रस्ट, आगरा के 'डॉ मनोरमा शर्मा ज्योतिष पुरस्कार' से उन्हे देश के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी के पुरस्कार-2009 से सम्मानित किया गया ।'द टाइम्स ऑफ एस्ट्रोलॉजी' तथा अध्यात्म एव ज्योतिष शोध संस्थान द्वारा प्रदत्त ज्योतिष पाराशर, ज्योतिष वेदव्यास, ज्योतिष वाराहमिहिर, ज्योतिष मार्तण्ड, ज्योतिष भूषण, भाग्यविद्यमणि, ज्योतिर्विद्यावारिधि ज्योतिष बृहस्पति, ज्योतिष भानु एवं ज्योतिष ब्रह्मर्षि आदि मानक उपाधियों से समय-समय पर विभूषित होने वाले श्री त्रिवेदी, सम्प्रति अपने अध्ययन, अनुभव एव अनुसंधानपरक अनुभूतियों को अन्यान्य शोध प्रबन्धों के प्रारूप में समायोजित सन्निहित करके देश-विदेश के प्रबुद्ध पाठकों, ज्योतिष विज्ञान के रूचिकर छात्रो, जिज्ञासुओं और उत्सुक आगन्तुकों के प्रेरक और पथ-प्रदर्शक के रूप मे प्रशंसित और प्रतिष्ठित हैं । विश्व के विभिन्न देशो के निवासी उनसे समय-समय पर ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त करते रहते हैं।

पुरोवाक

(द्वितीय परिवर्द्धित, परिमार्जित संस्करण)

या श्री: स्वयं सुमृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी: पापात्मनां कृतधियां रुदयेषु बुद्धि: ।

श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नत: स्म परिपालय देवि विश्वम् ।।

(श्रीदुर्गासप्तशती, अध्याय4-/श्लोक-5) भावार्थ- हे देवि! आप पुण्यात्माओं के गृहों में स्वयं ही लक्ष्मी छप पैं पापियों ' के यहाँ दरिद्रता के लय भे शुद्ध अन्तःकरण वाले व्यक्तियों के हृदय में बुद्धि रूप में, सत्पुरुषों में श्रद्धा रूप में तथा कुलीन मनुष्यों में लज्जा छप में निवास करती हें आपके इसी रूप को हम नमस्कार करते हैं हे देवि! आप सम्पूर्ण विश्क का पालन कीजिए मंत्र मंदाकिनी का प्रथम संस्करण पाठकों के मध्य पर्याप्त लोकप्रिय हुआ। मंत्र विज्ञान से सम्बन्धित जिस प्रकार की सामग्री की अपेक्षा और आकांक्षा थी, वह पाठकों को मंत्र मंदाकिनी में सहज ही उपलब्ध हो गई । दो वर्ष के अल्प अन्तराल में ही इस कृति की समस्त प्रतियाँ बिक गईं । अन्य व्यस्तताओं के कारण, द्वितीय संस्करण प्रकाशित नहीं किया जा सका । इस कृति के द्वितीय संस्करण में परिमार्जन तो बहुत पहले ही हो गया था, परन्तु कतिपय अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मंत्र प्रयोग भी द्वितीय संस्करण में सम्मिलित किए जाने थे । हमारे पास, हमारे गुरुवर आचार्य नरेन्द्र नारायण द्विवेदी, आचार्य गोविन्द शास्त्री, आचार्य जनार्दन पाण्डेय एवं अनेक मंत्र मर्मज्ञ द्वारा प्रदत्त अद्भुत और अनुभूत मंत्रों का संग्रह था, जिसका उपयोग हम अपने पास आने वाले जिज्ञासु पाठकों, अध्येताओं और आगन्तुकों के कल्याण हेतु विगत चालीस वर्षों से करते आ रहे थे। सम्भवत: इस अनुभूत और अद्भुत मंत्रों के संग्रह का, हमारे विलीन होते हुए जीवन के साथ ही विलय हो जाता । सहस्रों पाठकगण, इन अत्यन्त प्रभावशाली मंत्रों के उपयोग से लाभान्वित होंगे, यह हमारे लिए सुख, संतोष और आनन्द का आधार स्तम्भ है ।

मंत्र मंदाकिनी के प्रारम्भ में वैवाहिक विलम्ब, मंगली दोष के शमन, सन्तति सुख में अवरोध के निर्मूलन, धन-धान्य की प्रचुरता, व्यवसाय द्वारा धनोपार्जन, पदोन्नति, बन्धन-मुक्ति, प्रबल मारकेश परिहार, असाध्य व्याधि से मुक्ति, विविध समस्याओं के समाधान, पुत्र प्राप्ति, वैवाहिक विसंगतियों के समाधान आदि से सम्बन्धित मंत्र प्रयोग दिए गए हैं । मंत्र मंदाकिनी के पूर्व भाग को प्रपत्र के रूप में प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है ताकि पाठकों और जिज्ञासुओं को किसी ज्योतिर्विद के पास जाकर परामर्श प्राप्त करने की आवश्यकता न हो और व्यर्थ ही धन का उपयोग न करना पड़े । पाठकगण इन प्रपत्रों का उपयोग, अपनी आकांक्षा तथा प्रयोजन के अनुरूप सहज ही करके लाभान्वित हो सकते हैं।

मंत्र मंदाकिनी के उत्तरार्द्ध में श्रीदुर्गासप्तशती के अमोघ मंत्र एवं सम्पुट, श्रीरामचरितमानस की विविध मंत्र साधनाएँ, षट्कर्म के अन्तर्गत शान्ति कर्म, वशीकरण, विद्वेषण, उच्चाटन, स्तम्भन की चयनित, चिन्हित एवं परीक्षित साधनाएँ ही कृति का वैशिष्ट्य हैं । विस्तृत व्रत विधान, दान: दिव्य अनुष्ठान, विविध समस्याओं के समाधानं हेतु सांकेतिक साधनाएँ तथा मानस मंत्र साधना, नृसिंह मंत्र प्रयोग तथा शत्रु शमन आदि हेतु अनेक दुर्लभ मंत्र प्रयोग मंत्र मंदाकिनी मैं समाहित, संयोजित और सम्मिलित किए गए हैं । मंत्र मंदाकिनी मंत्र विज्ञान की एक प्रामाणिक कृति है जिसके अनुसरण से मंत्र साधना द्वारा समस्त समस्याओं का समाधान और अन्यान्य अभीष्टों की संसिद्धि सम्भव है । हमारी सबल सद्आस्था है कि सभी वर्गों के पाठकगण व मंत्र शास्त्र के जिज्ञासु छात्र, मंत्र मंदाकिनी के अनुसरण से अवश्य लाभान्वित होंगे । हमारी सद्आस्था का सकारात्मक परिणाम ही मंत्र शास्त्र की वास्तविकता का प्रमाण है और हमारे पाठकों की कामना की संसिद्धि, उनकी विविध आकांक्षाओं और प्रयोजनों का, मंत्र शक्ति के उपयोग द्वारा, साकार स्वरूप में रूपान्तरित होना ही हमारे परिश्रम का पावन पुरस्कार है । देश-विदेश के समस्त क्षेत्रों से सम्बन्धित प्रबुद्ध पाठकों का किसी भी माध्यम से, हमसे सम्पर्क स्थापित करके अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करके, परम सन्तोष प्राप्त करना ही हमारा परीक्षाफल है । आदि शक्ति, महाशक्ति, त्रिपुर सुन्दरी के पदपंकज एवं पदरज के प्रति हमारे सहस्रों जन सहज ही समर्पित हैं, जिनकी अपार अनुकम्पा और आशीष का ही प्रतिफल है मंत्र मंदाकिनी का समुष्ट, सारगर्भित लेखन । प्रेरणा और प्रोत्साहन के अभाव में मंत्र मंदाकिनी समतुल्य ग्रंथ का लेखन सम्भव नहीं हो सकता । हमें तो जगदम्बा, त्रिपुरसुन्दरी ने सदा ही परम पुनीत, पावन एवं प्रभूत, सारगर्भित, शास्त्रोक्त, पुराणोक्त तथा वेदगर्भित ज्ञान गंगा की सौरभ सुधा को निरन्तर प्रवाहित करने हेतु प्रेरित, प्रोत्साहित और उत्साहित किया, जिसे हमने उनका आदेश स्वीकार करके अलंध्य अवरोधों एवं व्यवधानों की चिन्ता किए बिना, अंतरंग आनन्द, अपार आहूलाद, अप्रतिम उत्साह, अद्भुत उल्लास, असीम उमंग तथा अशेष ऊर्जा के साथ सदा सर्वदा अभिसिंचित करने की चेष्टा की। अत: उस महाशक्ति, त्रिपुरसुन्दरी के प्रति हम अपने जीवन की समस्त अभिलाषाओं, आकांक्षाओं, अपेक्षाओं को सादर समर्पित करते हैं जिन्होंने हमें कृतकृत्य करके बार-बार धन्य किया है। मंत्र मंदाकिनी के सृजन क्रम में हम अपनी स्नेह सम्पदा, स्नेहाषिक्त पुत्री दीक्षा के सहयोग हेतु उन्हें हृदय के अन्तःस्थल से अभिव्यक्त स्नेहाशीष तथा अनेक शुभकामनाओं से अभिषिक्त करके हर्षोल्लास का आभास करते हैं । अपने पुत्र विशाल तथा पुत्री दीक्षा के नटखट पुत्रों युग, अंश, नवांश तथा पुत्री युति के प्रति भी आभार जिन्होंने अपनी आमोदिनी-प्रमोदिनी प्रवृत्ति से लेखन के वातावरण को सरल-तरल बनाया। स्नेहिल शिल्पी तथा प्रिय राहुल, जो हमारे पुत्र और पुत्री क जीवन सहचर हैं, का सम्मिलित सहयोग और उत्साहवर्द्धन हमारे प्रेरणा का आधार स्तम्भ है। धन्यवाद के क्रम में श्री राजेश त्यागी तथा श्री सदाशिव तिवारी सर्वाधिक प्रशंसनीय हैं जिन्होंने इस कृति की जटिलता को सुगम स्वरूप में, जन-सामान्य तक पहुँचाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

लेखक और उसकी रचना के मध्य का सर्वाधिक सशक्त सेतु प्रकाशक होता है । मंत्र मंदाकिनी के भव्य प्रकाशन तथा दिव्य साज-सज्जा हेतु प्रकाशक की प्रशंसा करना हमें हर्षित और आनन्दित करता है। श्री प्रेम शर्मा ने मंत्र मंदाकिनी के मुख पृष्ठ का निर्माण करके, इसके आकर्षण में वृद्धि की है । अत: हम अपने अनुभवी प्रकाशक और अत्यन्त सौम्य व शालीन गरिमापूर्ण व्यक्तित्व से आलोकित श्री अमृत लाल जैन तथा चित्रकार श्री प्रेम शमा को हृदय से साधुवाद प्रदान करते हैं । मंत्र मंदाकिनी की सघन शोध साधना एवं पराम्बा जगदम्बा की शक्ति के संज्ञान के समर और संग्राम की संघर्षपूर्ण यात्रा में प्रबुद्ध पाठकों, जिज्ञासुओं, सात्विक उपासकों, समर्पित आराधकों तथा आस्थावान भक्तों का सम्मिलित होना, अत्यन्त उल्लास, उत्साह और उमंग का विषय है। हमारी निर्मल आकांक्षा और सारस्वत, शाश्वत, सशक्त सद्आस्था है कि शोध पल्लवित, अनुसंधानपरक, ज्योतिष ज्ञान-विज्ञान और अनुराग से परम पवित्र पावन प्रगति पथ सदा सर्वदा अभिषिक्त, अभिसिंचित, आनन्दित और आह्लादित होता रहेगा।

 

Contents

 

1 मंत्र: वैज्ञानिक व्याख्या 1-24
2 मंत्र विज्ञान: विविध विधान 25-54
3 ग्रह शान्ति 55
4 विवाह सम्बन्धी समस्याएँ एवं समाधान 89
5 संतति सुख: परिहार परिज्ञान 151
6 अरिष्ट ग्रह योग कृत अवरोध शमन 169
7 प्रचुर धनप्रदाता अनुभूत साधानाएँ 191
8 शत्रु शमन तथा प्रतिदूंदी दमन 199
9 असाध्य व्याधि तथा मृत्युतुल्य कष्ट से मुक्ति हेतु मंत्र तथा अनुष्ठान 223
10 परीक्षा तथा प्रतियोगिता में श्रेष्ठ सफलता 263
11 समस्त बाधायें निर्मूल करके मनोकामना की संपूर्ति 277
12 वांछित पदोन्नति प्राप्ति 279
13 विस्तृत व्रत विधान 285
14 दान अनुष्ठान: श्रेष्ठ परिहार प्रावधान 293
15 श्रीदुर्गासप्तशती सत्रिहित आराधनाएँ अभीष्ट संसिद्धि हेतु साधनाएँ 321
16 अन्नाय समस्याओं के समाधान हेतु संक्षिप्त एवं सुगम सांकेतिक साधनाएँ 335
17 सुखद दाम्पत्य हेतु सुगम सांकेतिक साधनाएँ 355
18 मानस मंत्र साधना 371
19 षट्कर्म प्रयोग 385

 

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