प्रस्तुत ग्रन्थ अपने ढंग की एक अद्वितीय कृति है। महाराजा जसवंतसिंह के काल में मुंहणोत नैणसी के द्वारा लिखित यह एक मारवाड़ का गजेटियर है जिसमें मारवाड़ के विभिन्न परगनों के अन्तर्गत आने वाले सभी गाँवों का जैसा विस्तृत वर्णन दिया गया है वैसा हमारे आधुनिक गजेटियरों में भी प्राप्त नहीं होता । भौगोलिक, ऐतिहासिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सामाजिक दृष्टि से जो व्यौरेवार विवरण यहाँ प्रस्तुत किये गये हैं वे न केवल इतिहास के अध्ययन के लिये उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं अपितु उनसे हमें विभिन्न आधुनिक समस्याओं के अध्ययन के लिये भी प्रेरणा प्राप्त हो सकती है।
लगभग ३०० वर्ष पूर्व तैयार किया गया यह ग्रन्थ हमारी एक अनुपम राष्ट्रनिधि है जिसके प्रथम भाग को प्रकाशित करते हुये, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर एक विशेष गौरव और उल्लास का अनुभव करता है। इस ग्रन्थ के लेखक की सुप्रसिद्ध ग्रंथ "मुहता नैणसी री ख्यात" को इसो प्रतिष्ठान द्वारा चार भागों में प्रकाशित किया जा चुका है। उसमें जो ऐतिहासिक सामग्री दी गई है उसको समझने के लिये कहीं-कहीं पर प्रस्तुत ग्रन्थ से बड़ी सहायता मिल सकती है। इस ग्रन्थ के सम्पादन में डॉ० नारायणसिंह भाटी ने जो परिश्रम किया है उसके लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने इस ग्रन्थ को अधिकाधिक उपयोगी बनाने के लिये अनेक परिशिष्ट तैयार किये हैं जो कि विस्तार-भय से इस भाग में नहीं दिये जा रहे है। इन परिशिष्टों के लिये विद्वान् पाठकों को अगले भागों के प्रकाशन तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। आशा है कि इसका दूसरा भाग अगले दो महीनों में प्रकाशित हो जायगा और उसके पश्चात् शीघ्र ही तृतीय भाग पाठकों तक पहुंच सकेगा ।
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