"संगीत और भारतीय दर्शनः उपनिषद, वेद, और पुराणों का योगदान" पुस्तक के माध्यम से आप सभी से संवाद करते हुए मुझे अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है। यह पुस्तक मेरे जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलुओं भारतीय शास्त्रीय संगीत और भारतीय दर्शन के बीच के गहरे संबंधों की खोज का परिणाम है।
भारतीय संस्कृति में संगीत को कभी भी मात्र मनोरंजन का साधन नहीं माना गया है।
प्राचीन काल से ही संगीत को आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष प्राप्ति का एक माध्यम माना जाता रहा है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में संगीत के महत्व और उसके दार्शनिक पहलुओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस पुस्तक में मैंने इन्हीं प्राचीन ग्रंथों में निहित संगीत संबंधी ज्ञान को समझने और उसे सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
इस पुस्तक में मैंने विशेष रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि यह परंपरा वैदिक काल से लेकर आज तक अनवरत रूप से विकसित होती रही है। पुस्तक में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ उनके हिंदी अनुवाद भी दिए गए हैं, ताकि पाठक प्राचीन ज्ञान के मूल स्रोत से भी परिचित हो सकें।
मैं अपने पिता और गुरु श्री चंद्रशेखर गौड़ का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे संगीत और दर्शन दोनों की शिक्षा दी और जीवन के सत्य से परिचित कराया। मैं अपने सभी गुरुजनों, विद्वानों और संगीतज्ञों का भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके ज्ञान और मार्गदर्शन से मैं इस पुस्तक को लिखने में सफल हो पाया।
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