श्रीमद्देवीभागवतु पुराण की कथा सेनिःसृत 380 अमृत-वाक्यों का दिव्य संग्रह है। यह ग्रन्थ केवल पढ़ने के लिए नहीं है- यह आत्मा को जगाने, मन को निर्मल करने और जीवन को दिशा देने के लिए है । "ज्ञानामृत" में सङ्कलित 380 सटीक और सारगर्भित उद्धरणों में वह शक्ति है जो आपके भीतर की नींद में सोई दिव्यता को झकझोर सकती ह, आपको माया के जाल से परे आत्मसाक्षात्कार की ओर प्रेरित करती है और आपके हृदय को पराम्बा की करुणा से भर देती है। यह सङ्ग्रह न केवल ज्ञान, भक्ति और वैरग्य की अनूठा त्रिवेणी है, बल्कि इसमें देवी के अद्वितीय स्वरूपों, वेद व्यास की वाणी, ऋषियों की दृष्टि, कमर्फ ल के रहस्य और माया का पदा उठाने वाले बोधवाक्यों का सार समाहित है। यह पुस्तक उनके लिए हैजो श्रवण को साधना मानतेहैं, जो गुरु, गौ, गङ्गा और गायत्री केअर्थको समझना चाहतेहैं और जो देवे के चरणों में मन को स्थिर कर जीवन का अर्थ खोजना चाहते हैं। हर पक्कि एक दीपक है- जो भीतर केहलचल को शान्त करता है। हर वाक्य एक मन्त्र है - जो जीवन को तप और प्रम्सेसुगन्धित करता है । ज्ञानामृत आपके लिए है, यदि आप केवल पढ़ना ही नहीं, अपित और गहेरउतरकर स्वयं को प्रकाशित करना चाहते हैं ।
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