मैं बोरिशाइल्ला: A Novel on Bangladesh
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मैं बोरिशाइल्ला: A Novel on Bangladesh

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Item Code: NZE735
Author: महुआ माजी (Mahua Maji)
Publisher: Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd.
Language: Hindi
Edition: 2013
ISBN: 9788126718559
Pages: 402
Cover: Paperback
Other Details 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 430 gm

पुस्तक के विषय में

बांग्लादेश में एक सांस्कृतिक जगह है बोरिशल | बोरिशल के रहनेवाले एक पात्र से शुरू हुई यह कथा पूर्वी पाकिस्तान के मुक्ति संग्राम और बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र के अभ्युदय तक ही सिमित नही रहती बल्कि उन परिस्थितियों की भी पड़ताल करती है, जिनमें सांप्रदायिक आधार पर भारत का विभाजन हुआ और फिर तथा भौगोलिक आधार पर पाकिस्तान टूटकर बांग्लादेश बना | समय तथा समाज की तमाम विसंगतियों को अपने भीतर समेटे यह एक ऐसा बहुआयामी उपन्यास है जिसमे प्रेम की अंतःसलिला भी बहती है तथा एक देश का टूटना और बचना भी शामिल है | यह उपन्यास लेखिका के गंभीर शोध पर आधारित है और इसमें बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों तथा उर्दूभाषी नागरिकों द्वारा बांग्लाभाषियों पर किए गए अत्याचारों तथा उसके जबरदस्त प्रतिरोध का बहुत प्रामाणिक चित्रण हुआ है | उपन्यास का एक बड़ा हिस्सा उस दौर और लूट, हत्या, बलात्कार, आगजनी की दारुण दास्तान बयान करता है | उस दौरान मानवीय आधार पर भारतीय सेना द्वारा पहुँचाई गयी मदद और मुक्तिवाहिनी को प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय सीमा क्षेत्र में बनाये गए प्रशिक्षण शिविरों तथा अन्तरराष्ट्रीय स्टार पर भारत सरकार द्वारा निभाई गई भूमिका का भी ज़िक्र इसमें है | युवा लेखिका महुआ माजी का यह पहला उपन्यास है, लेकिन उन्होंने राष्ट्र राज्य बनाम साम्प्रदायिक राष्ट्र की बहस क बहुत ही गम्भीरतासे इसमें उठाया है और मुक्तिकता को भाषायी राष्ट्रवाद की अवधारणा की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया है | ज़मीन से जुडी कथा भाषा और स्थानीय प्रकृति तथा घटनाओं के जीवन्त चित्रण की विलक्षण शैली के कारन यह उपन्यास एक गम्भीर मसले को उठाने केबावजूद बेहद रोचक और पठनीय है |




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