देववाणी संस्कृत जीवन को आलोकित करने वाली भाषा है। यह भाषा ज्ञान-विज्ञान आदि का भण्डार होने के साथ-साथ मानव जीवन का पथ प्रदर्शक है। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) की परीक्षा के लिए अभी तक कोई पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था। इसलिए इस परीक्षा की तैयारी हेतु जितनी पुस्तकें लिखीं गयी, वे सभी अनुमान के आधार पर लिखी गयीं। इससे प्रतियोगी परीक्षार्थियों को DSSSB, TGT संस्कृत की तैयारी में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। परन्तु प्रथम बार TOT संस्कृत विषय का पाठ्यक्रम DSSSB के द्वारा उपलब्ध कराया गया है।
DSSSB, TGT संस्कृत विषय से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के विशेष आग्रह पर पहली बार इस परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों की परीक्षोपयोगी आवश्यकता को ध्यान में रखकर 'परीक्षादर्पण" नामक इस पुस्तक का लेखन मेरे द्वारा किया गया है। "परीक्षादर्पण" संस्कृत विषय की परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण और सम्पूर्ण भारत की उत्कृष्ट एवं सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है। सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का सारगर्भित विश्लेषण करने के पश्चात् इस पुस्तक का लेखन किया गया है। संस्कृत विषय के पाठ्यक्रम के अनुसार ही सभी तथ्यों और सम्पूर्ण महत्त्वपूर्ण विषय सामग्री का संकलन किया गया है। इस पुस्तक में आवश्यकतानुसार चार्ट, आरेख, टेबल एवं साथ ही साथ ग्रन्थों का मूल, अर्थ, व्याकरणात्मक टिप्पणी और सुक्तियों आदि को दिया गया है। सभी आवश्यक सामग्रियों के संकलन के साथ-साथ उसका गहन और व्यापक निरीक्षण, परीक्षण एवं पर्यालोचन भी बहुत ही सावधानी पूर्वक किया गया है, जिससे यह एक मानक पुस्तक बन सके। प्रस्तुत पुस्तक के अन्त में DSSSB, TGT संस्कृत विषय की जितनी भी परीक्षाएँ अभी तक हुई हैं, उन सभी प्रश्नपत्रों को हल के साथ इसमें संलग्न किया गया है। जिससे अभ्यर्थियों की परीक्षा की तैयारी बहुत ही आसान हो जाएगी। पह सुधी पाठकों के अध्ययन को बहुत अधिक सुगम बनाएगा।
परीक्षादर्पण' पुस्तक का लेखन बहुत ही अमपूर्वक पूरी ईमानदारी के साथ किया गया है। अतः मुझे पूर्ण विश्वास और उम्मीद है कि यह पुस्तक आप सभी अभ्यर्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी एवं लाभदायक होगी। यदि पुस्तक में कोई टंकण या मुद्रण सम्बन्धी अथवा अन्य किसी प्रकार की न्यूनता रह गयी हो तो सुधीजनों से विनम्र आह है कि कृपया आप मुझे इसके बारे में अवश्य सूचित करें।
प्रस्तुत ग्रन्थ की प्रेरणा एवं पूर्णाहुति मेरे आराध्य और मेरे सम्पूर्ण जीवन के एकमात्र आधार प्रभु श्रीराम जी की कृपा द्वारा ही सम्भव हो पाया। प्रभु के श्री चरणों को प्रणाम करता हूँ और प्रभु की कृपा मुझ अकिंचन पर सदैव बनी रहे, अपने आराध्य से पही मेरी विनती है। साथ ही मैं अपने माता-पिता और गुरुजनों के श्री चरणों में विनयानवत हूँ, जिनके आशीर्वाद से ही यह कार्य सम्पन्न हो पाया है। बिना मित्रों और सुहृदजनों के यह गुरुतर कार्य असम्भव था। अतः मैं अपने मित्रों एवं सुहदजनों का भी हार्दिक धन्यवाद करता हूँ। जिनका सहयोग एवं प्रोत्साहन मुझे निरन्तर प्राप्त होता रहता है, साथ ही साथ चौखम्मा ओरियण्टालिया के ऊर्जावान् प्रकाशक अजय गुप्ता तथा टंकणकर्त्ता रमेश शर्मा (श्री ओ३म कम्प्यूटर दिल्ली) का भी हृदय से धन्यवाद करता हूँ, जिनके प्रयास से यह पुस्तक आप सभी के समक्ष उपस्थित हो पायी है।
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