पुस्तक परिचय
पुस्तक अंश : प्रसिद्ध अमेरिकी साहित्य तथा फिल्म आलोचक, सेमुर चैटमैन ने अपनी पुस्तक स्टोरी एवं डिस्कोर्स: नैरेटिव स्ट्रक्चर इन फिकशन एवं फिल्म में टिप्पणी की है: यह जानना बेहद दिलचस्प है कि हमारा मस्तिष्क (माइंड) आदतन ही कथा-कहन में एक संरचना ढूंढ़ने लगता है।... पाठक की रूढ़िबद्ध धारणाएँ, कथा-कहन (नैरेटिव) में अनुक्रम तथा कार्य-कारण संबंधों को कथा-कहन में ढूंढ निकालने के लिए प्रेरित करती हैं। कई विचारकों ने इस संरचना (स्ट्रक्चर) को दो हिस्सों में वर्गीकृत किया है : 'कहन-ढंग' (मैनर) तथा 'वस्तु' (मैटर); 'किस प्रकार' (हाऊ) तथा 'क्या' (व्हॉट); अथवा अभिव्यक्ति सतह (ऐक्सप्रैशन-प्लेन) एवं कथ्य-सतह (कंटेंट-प्लेन) ।.. ...चेक भाषा-विज्ञ, सौंदर्यशास्त्री व चिंतक मुकारावस्की 'संरचना' के विचार को, संयोजन (कॉम्पोजीशन) तथा पीठिका (कॉन्टैक्स्ट) से भिन्न मानते हैं। उनके अनुसार जब तक कोई भी 'संयोजन' अपनी पूर्णतम अवस्था को प्राप्त नहीं कर लेता उसे 'संयोजन' मानना उचित न होगा। बिना वाक्य की 'पीठिका' प्राप्त हुए वह अर्थ-हीन वाक्य माना जाएगा। लेकिन एक 'खंडित चरित्र' के बावजूद काफ्का के 'द ट्रायल' को कहन तथा शब्दार्थ के स्तर पर एक 'अर्थ-पूर्ण-संरचना' का दर्जा दिया जाता है। अतः 'संरचना' संयोजन (काम्पोज़ीशन) से इस रूप में भिन्न है कि 'संरचना' हमेशा बंद ही नहीं 'खुलेपन' (ओपेननैस) की भी वाहक होती है।
लेखक परिचय
प्रो. पवन माथुर (जन्म: 1951) पवन माथुर, हिंदी को सुप्रसिद्ध कवि गिरिजा कुमार माथुर तथा शकुन्त माथुर के सुपुत्र है। दिल्ली विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में एम.एस.सी तथा पीएच.डी. की उपाधि के बाद प्रसिद्ध प्रिंसटन विश्वविद्यालय, प्रिंसटन, संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ वर्षों तक शोध कार्य में व्यस्त रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में रीडर रहे तथा यहीं से प्रोफेसर के के पद से सेवा निवृत्त हुए। बीस से अधिक शोध छात्रों ने उनके दिशा-निर्देश में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की और यह शोध कार्य अधिकांशतः अंतरराष्ट्रीय-जर्नलों में प्रकाशित हुए। सहयोगी पुस्तकें : मुट्ठियों में बंद आकार (1971), 'सगीकरण' (1972), 'विचार कविता' (1973), 'लंबी कविताएँ और नरेन्द्र मोहन' (1999), 'सृजन के तीन आयाम' (2003, 'विश्वम्भर नाथ उपाध्याय पर केंद्रित), 'करक कलेजे माहि' (2005, 'महीप सिंह स्मृति'), शमशेर की दुनिया' (2016, 'शमशेर शताब्दी स्मरण')। प्रकाशित कविता/कथा/आलोचना पुस्तकें 'एक शब्द है है मेरे पास' (2001), शब्द बीज (2007), 'संभव होने की अजस धारा' (2022), 'हासिल' (2023), 'पाश्चात्य कथा-कहन चिंतन और हिंदी कहानी' (2025) 1 संपादित पुस्तकें : 'गिरिजा कुमार माथुर रचना संचयन' (साहित्य अकादमी के लिए)'. (2019), 'सुधियों उस चंदन वन की' (2020), 'काल पर छूटी निशानी (2020), (उपरोक्त दोनों पुस्तकें 'गिरिजाकुमार माथुर की काव्य आलोचना पर केंद्रित'), 'शकुन्त माथुर कविता समग्र (2023)1 सम्मान: 'शब्दबीज' पर हिंदी अकादेमी, दिल्ली का साहित्यिक कृति सम्मान (2010); 'संभव होने की अजस्र धारा' पर मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल द्वारा 'नरेश मेहता स्मृति वाङ्मय सम्मान (2023)। पवन माथुर ने रसायन शास्त्र के अलावा जैविकी, भाषा-विज्ञान और साहित्य के अंतर्संबंधों पर सार-गर्भित लेख लिखे एवं व्याख्यान भी दिये।
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