भूमिका
संगीत के उत्थान में अनेक विद्वानों ने गायन एवं वादन सम्बन्धी अनेक पुस्तकें लिखीं जिसके प्रयोग से संगीत शिक्षार्थियों को यथेष्ट सहायता मिली; फिर भी अभी अच्छी पुस्तकों की इतनी कमी है जिससे कि शिक्षार्थी-वर्ग पूर्णरूपेण लाभान्वित हो सके। गायन तथा वादन की अनेक पुस्तकें विद्यमान है, किन्तु नृत्य की ओर से अभी तक हमारे संगीतज्ज्ञ उदासीन से रहे हैं। मेरे मस्तिष्क में नृत्य की पुस्तक लिखने के अंकुर कुछ समय पहले ही पनप चुके थे परन्तु उसे कुछ परिस्थितियों वश कार्य रूप में परिणित नहीं कर पा रहा था, लेकिन इसकी कमी मेरे हृदय में बराबर खटकती थी। उच्च कक्षाओं के छात्रों को इस विषय पर समुचित पुस्तक न होने के कारण परीक्षा में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अस्तु मैंने सर्वप्रथम उच्च कक्षाओं के कतिपय परीक्षोपयोगी प्रश्नों को को तद्-विषयक (नृत्य) के प्राचीन ग्रन्थों के आधार-स्वरूप सरल, सुबोध तथा रोचक भाषा में प्रश्नोत्तरी के रूप में इस विस्तृत विषय को सागर में गागर भरने जैसा लघु प्रयास किया है। इस पुस्तक के लेखन में श्री जगदीश सिंह ठाकुर, प्रधानाचार्य श्री लक्ष्मण संगीत विद्यालय, रायगढ़ (मध्य प्रदेश) से मुझे अत्यधिक सहायता एवं प्रेरणा मिली। इसके लिए मैं उनका विशेष कृतज्ञ हूँ ।
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