हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को : सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
भारतीय संविधान भारतीय राजनीति की आधारशिला है। यह न केवल शासन की रूपरेखा प्रदान करता है बल्कि सिद्धात भी प्रदान करता है। विकास की राह में लोकतंत्र की अहम भूमिका रही है। आजादी के बाद; भारत ने लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली को चुना, जिससे जल्द ही कल्याणकारी नीति और समाजवाद को बढ़ावा मिला। इसी समाजवाद ने लगभग 75 वर्षों तक विकास की दशा और दिशा तय की। लेकिन 1990 तक इसने भारत को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया कि उसके बाद उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। आज जब गठबंधन की राजनीति का युग स्थायी हो गया है. कोई सरकार आये, इन नीतियों में आमूल-चूल परिवर्तन कर पाना संभव नहीं है। सरकार के सामने चुनौती लोगों के भौतिक विकास को कायम रखने और अपनी संवैधानिक प्रतिवद्धताओं को साथ लेकर चलने को है। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक द्वारा इन्हों अंतर्संबंधों को समझाने का प्रयास किया गया है। किस प्रकार विभिन्न सरकारों ने संवैधानिक प्रावधानों केंद्र राज्य के बीच लोकतांत्रिक संबंध, मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों और वैश्विक लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के बीच समन्वय और संश्लेषण करने का प्रयास किया है। यह भारतीय संविधान की पारगमन स्थितियों की पड़ताल करता है और इसका भारत के संविधान पर प्रभाव पड़ा है। यह पुस्तक हमारे संविधान की पारंपरिक से लोकतांत्रिक की ओर यात्रा की पड़ताल करती है। इन सभी बातों को लेखक ने सटीक विश्लेषण के साथ स्पष्ट किया है
वर्तमान में राजनीति विज्ञान (10+2) बी. पी. एस. सी., बिहार शिक्षिका के रूप में कार्यरत डॉ. खुशबू कुमारी एक मध्यम परिवार में जन्मी एवं सामाजिक पारिवारिक परिस्थितियों का सामना करते हुए शुरू के समय से ही अध्ययन अध्यापन में विशेष रूचि का परिचय देते हुए आज वे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगतिशील हैं और हर काम को कुशलतापूर्वक करने के आदि रही हैं। इन्होंने 2011 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया तथा स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधि पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान विषय में प्राप्त की। इसके उपरांत इन्होंने बी. एड. एवं पी एच. डी. की उपाधि प्राप्त करने के दरमपान ही इन्होंने इस विषय पर विशेष रुचि का परिचय दिया। प्रारम्भ से ही सामज के कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश ने आज इनकों शिक्षण के क्षेत्र में अवसर की उपलब्धता कराने में सफल हुआ है। समाज में महिलाओं के बीच शिक्षा का प्रसार एवं जागरूकता लाना इनके उद्देश्यों में से एक हैं। इनके शोध पत्र और आलेख कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है, साथ ही कई सभा एवं सेमिनार में इनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है। सामाजिक विषयों पर पकड़ एवं कानूनी व राजनीतिक विचारों में रूचि के कारण यह पुस्तक लिखी गई है, जी स्नातक के छात्रों एवं राजनीति विज्ञान में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेंगा। इनका राजनीति के क्षेत्र में किया गया यह कार्य उच्च कोटि का है।
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