लेखक परिचय
डॉ. एम. आर. सिंगारिया पदस्थापन : सहआचार्य एवं विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, स.ध. राजकीय महाविद्यालय, ब्यावर (राजस्थान) आजीवन सदस्यता: 1. Indian Economic Association (IEA), 2. The Indian Econometric Society (TIES), 3. Indian Association for the Study of Population (IASP), 4. Rajasthan Economic Association (REA) शोध-क्षेत्र : आर्थिक विकास Economic Development, 2. Demographic Studies, 3. Econometric Analysis, 4. Macro Economics प्रकाशित पुस्तकें : 1. Population Growth and Economic Development in Rajasthan-An Econometric Analysis सदस्य अन्तर्राष्ट्रिय सम्पादक मण्डल : 1. Journal of Finance and Economics (JFE), 2. International Journal of Econometrics and Financial Manage-ment (IFEFM), 3. Growth (Asian online Journals.com) शोध आलेख : चालीस से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ।
डॉ. हरीश कुमार पदस्थापन : सहआचार्य, हिन्दी-विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जैतारण (पाली) राजस्थान शोध-क्षेत्र : अज्ञात एवं अल्पज्ञात सन्तों की वाणी, पाण्डुलिपियों पर शोधपरक अध्ययन • प्रकाशन : 1. रामसनेही सम्प्रदाय परम्परा एवं मूल्यांकन, 2. रामसनेही सन्त राघोदासजी : जीवन एवं दर्शन प्रकाशाधीन : 1. सन्त नामदेव, 2. भारतीय साहित्य एवं संस्कृति के विविध आयाम (सम्पादन) शोध आलेख : 30 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित • शोधपरक अध्ययन हेतु सम्मानित : 1. भारतीय दलित साहित्य अकादमी, दिल्ली, 2. अखिल भारतीय रामस्नेही सम्प्रदायाचार्य पीठ-रामधाम खेड़ापा, 3. अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामस्नेही-सम्प्रदाय (शाहपुरा), 4. अखिल भारतीय राजभाषा हिन्दी सेवी सम्मान पुरस्कार
पुस्तक परिचय
संविधान निर्माता, भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की दृष्टि में राष्ट्रहित सर्वोपरि था। उन्होंने समतावादी और मानवतावादी सिद्धान्तों पर भारतीय समाज के पुनर्गठन हेतु जीवन भर संघर्ष किया। वे न केवल एक महान राष्ट्रीय नेता और प्रख्यात न्यायविद् थे वरन अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशिष्ट विद्वान भी थे। वे बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न व्यक्तित्व के धनी एवं बीसवीं सदी के प्रखर राजनेता थे, जिन्होंने भारतीय राजनीति, आर्थिक एवं सामाजिक जीवन के अनगिनत पहलुओं को समृद्ध कर राष्ट्र-निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र-निर्माण पर उनकी दृष्टि समानता और बन्धुत्व की अवधारणा पर आधारित है। उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में मानवाधिकारों के संरक्षण की वकालत की। उनके राष्ट्रनिर्माण की दृष्टि सामाजिक परिवर्तन और मानव मात्र के कल्याण में निहित थी। शिक्षा महिलाओं के लिए भी उतनी ही जरूरी है जितनी पुरुषों के लिए। मैं एक समुदाय की प्रगति को उस प्रगति की डिग्री से मापता हूँ जो महिलाओं ने हासिल की है। कानून और व्यवस्था, राजनीतिक शरीर की दवा है। जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए।
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