साधन-नवनीत: Sadhan Navneet

साधन-नवनीत: Sadhan Navneet

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Item Code: GPA203
Author: जयदयाल गोयन्दका (Jaya Dayal Goyandka)
Publisher: Gita Press, Gorakhpur
Language: Hindi
ISBN: 8129305852
Pages: 172
Cover: Paperback
Other Details 8 inch x 5.5 inch
Weight 150 gm

निवेदन

प्रस्तुत पुस्तक श्रीमद्भगवद्रीताकी सुप्रसिद्ध टीका-'तत्त्व-विवेचनी' के टीकाकार एवं 'तत्त्व-चिन्तामणि'-जैसे पारमार्थिक वृहद् गन्धके रचयिता आध्यात्मिक विचारों एवं भगवद्भावोंके प्रचारक-ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके बहुमूल्य आध्यात्मिक चिन्तन और प्रवचनोंका सार है । यह सर्वहितकारी और साधनोपयोगी होनेसे जनहितार्थ प्रकाशित किया जा रहा है ।

इसमें जीवन-सुधार, भजन-साधन, नाम-जप और सत्संग आदिकी उत्तम बातें उद्धरणोंके रूपमें दी गयी हैं । प्रस्तुत संकलन- भगवन्नाम, महात्मा, भक्त, सत्संग, समता, वैराग्य, चित्त-निरोध, सदुण-सदाचार, सत्य, अक्रोध (क्षमा), ब्रह्मचर्य, परोपकार आदि विभिन्न पारमार्थिक बिन्दुओंपर अड़तीस प्रकरणोंमें मार्मिक और सर्वजनोपयोगी प्रकाश डालता है । इस प्रकार सत्य और श्रेष्ठ भावोंकी प्रसारिका तथा मार्गदर्शिका होनेसे ही प्रस्तुत पुस्तक-'साधन-नवनीत' है ।

सभी प्रेमी पाठकों-विशेषत: परमार्थ-पथके पथिकों और सत्संग जिज्ञासुओंसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि वे इस पुस्तकको कृपया एक बार अवश्य पढ़ें और दूसरोंको भी पढ़नेके लिये प्रेरित करें । हम आशा करते हैं कि इसकी सर्वजनोपयोगी, साधनमें सहायक और उपादेय सामग्रीसे अधिकाधिक सज्जन विशेष लाभ उठायेंगे ।

 

विषय-सूची

 

विषय

पृं.सं

1

भगवन्नाम – भजन

1

2

भगवन्नाम

10

3

महात्माओंकी महिमा

21

4

महात्मा

29

5

भक्त

30

6

सत्संग

35

7

समता

41

8

वैराग्य

43

9

चित्त -निरोध

58

10

ध्यान

67

11

सद्ग-सदाचार

72

12

नित्यकर्म-उपासना

80

13

सत्य

83

14

अक्रोध क्षमा

84

15

ब्रह्मचर्य

87

16

ब्रह्मचर्य -रक्षाके उपाय

89

17

परोपकार

92

18

धर्म

98

19

प्रतिकूलतामें प्रसन्नता

104

20

बाल-शिक्षा

111

21

अष्टांग योग

116

22

भारतीय संस्कृति

120

23

ब्राह्मणत्वकी रक्षा परम

 
 

आवश्यक है

122

24

आदर्श राजा

124

25

समाज - सुधार

125

26

व्यापार - सुधार

128

27

मृत्युकालीन उपचार

133

28

तीर्थोंमें पालन करने

 
 

योग्य

137

29

स्त्री-शिक्षा

141

30

विधवाओंके लिये

147

31

स्त्रीमात्रके कर्त्तव्य

150

32

कन्याओंके कर्त्तव्य

157

33

भगवत्प्राप्ति

159

34

परमपदकी प्राप्ति

162

35

ग्रामोद्योग - अहिंसा

163

36

मांसाहार - निषेध

165

37

पुरुषोंके लिये

167

38

व्यावहारिक बातें

168

 

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