पुस्तक परिचय
केरल का कोषक्किोड (कालीकट) शहर पिछले दिनों (अक्टूबर 2023 को) 'साहित्य शहर' की उपाधि से नवाजा गया जो वस्तुतः इस शहर अथवा केरल प्रांत के लिए ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व की बात है। यूनेस्को (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) द्वारा दिया जाने वाला यह खिताब सर्वप्रथम स्कॉटलैण्ड के एडिनबरा शहर को मिला था। अपनी जीवंत और गतिशील साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों की संपन्नता के लिए प्रदत्त यह सम्मान अब तक दुनिया के चंद शहरों को ही नसीब हुआ है।
लेखक परिचय
पी. के. राधामणि: केरत के जिला विश्सूर के अंतर्गत गीय वाका में जन्म। एम.ए. पीएच. डी. (हिंदी) कोषिक्कोड सामूतिरि गुरुवायूरप्पन कॉलेज और मतवार क्रिस्टियन कॉलेज में बत्तीस सालों के अध्यापन के बाद हिंदी विभागाध्यक्षा के पद से सेवानिवृत्त । प्रकाशित पुस्तकें : भक्ति आंदोलन और सामाजिक जागरण (शोच, सार्थक प्रकाशन, नई दिल्ली-2002), ज्ञानपीठ पुरस्कार जेताक्कळ (मलयालम, संपादित), सांस्कृतिक प्रकाशन विभाग, केरल सरकार, 2004), कहानी सूफी की जबानी (के.पी. रामनुष्णि के केरल साहित्य अकादमी अवार्ड प्राप्त मलयालम उपन्यास सूफी पर कथा का हिंदी अनुवाद, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, 2005), शैतान की औलाद (ज्ञानपीठ विजेता एम.टी वासुदेवन नायर के मलयालम उपन्यास असुरवित्त का हिंदी अनुवाद, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2009), जिंदगी की किताब (के.पी. रामनुण्णि के भारतीय भाषा परिषद् अवार्ड और ववतार अवार्ड प्राप्त मलयालम उपन्यास जीवितत्तिन्टे पुस्तकम का हिंदी अनुवाद, सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली, 2010), वादियाँ बुलाती है हिमालय की की (पूर्व संसदीय सहमंत्री एम.पी वीरेंद्र कुमार के मूर्तिदवी पुरस्कार प्राप्त यात्रा विवरण हैमवतभूविल' का हिंदी अनुवाद, राजस्थान पत्रिका प्रकाशन, जयपुर, 2011), कथा भारतम (वाईस भारतीय भाषाओं से मलयालम में अनूदित बाईस कहानियों का संकलन, मातृभूमि बुक्स, कोषिक्कोड, 2012), प्रतिनिधि मलयालम कहानियाँ (मलयालम से हिंदी में अनूदित इकतीस कहानियों का संपादित संकलन, सस्ता साहित्य मण्डल, नई दिल्ली, 2012), 'बन्धंगल' (अकादमी पुरस्कार प्राप्त मैथिली कथा संकलन सरोकार का मलयालम अनुवाद, साहित्य अकादमी, 2015; श्री श्रीनारायण गुरु सामाजिक जागरण के अग्रदूत (सस्ता साहित्य मण्डल, नई दिल्ली, 2017) पानोत्सवंगत्वकु विटा (हिंदी साहित्यकार रवीन्द्र कालिया के 'गालिब छुटी शराब' का मलयालम अनुवाद (मातृभूमि बुक्स, कोषिक्कोड, 2019), तमिल कचकळ (पच्चीस तमिल कहानियों के अनुवाद का संपादित संकलन, कुरुक्षेत्रा प्रकाशन, 2019), प्रणय की तीसरी आँख (के.वी. मोहनकुमार के 'प्रणयत्तिन्टे मून्नां कण्णु' का हिंदी अनुवाद-जगत भारती प्रकाशन, प्रयागराज, 2019, अक्षरंगलुटे निषलिल (अमृता प्रीतम की आत्मकथा 'अक्षरों के साए में' का मलयालम अनुवाद, मातृभूमि बुक्स, कोषिक्कोड, 2020), गुरुनानक वाणी (मलयालम अनुवाद, एन.बी.टी. इंडिया, 2021) यात्रकळ नाटिलुम मरुनाटुकळिलुम (यात्रा विवरण, सुजिली प्रकाशन, 2021), केरलीय नवजागरण के अग्रदूत (सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन), तीन मलयालम उपन्यास (जवाहर पुस्तकालय)। पुरस्कार, प्रशस्तियाँ: अनुवाद के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (2023), केंद्रीय हिंदी निदेशालय का हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार (2011), भाषा समन्वय पुरस्कार, हिंदी सेवी सम्मान तथा अन्य पुरस्कार।
प्राक्कथन
केरल प्रांत का कोषिक्कोड, जो कालीकट के नाम से भी जाना जाता है, लेखन और वाचन की ऊर्जा से भरे लोगों का शहर है। 21 अक्तूबर 2023 को यूनेस्को ने कोषिक्कोड को 'साहित्य शहर' घोषित किया। मेरा जन्म इस शहर में नहीं हुआ, लेकिन पिछले पचास सालों से यह मेरी कर्मभूमि है। 1975 में सामूतिरि गुरुवायूरप्पन कॉलेज में जूनियर प्राध्यापिका की नौकरी पाने के बाद मैंने इस शहर को अपना स्थायी पता बनाया। इसने मुझे जीविका दी और यहीं मेरे सपने साकार हुए। इसने मुझमें साहित्य का आलोक भर दिया और इस मिट्टी में पैर रखकर मैंने साहित्य की दुनिया में चलना सीखा। मेरी किताबें छपीं। मैं अनुवादक बनी। अनुवाद के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। अपने जन्मस्थान में मैंने सिर्फ़ बीस साल बिताए। बाक्री सालों में इस शहर से मेरा घनिष्ठ संबंध बना रहा। मेरे सुख-दुख से इसका अभिन्न रिश्ता है। मेरे जीवन की सुखद दुखद घटनाएँ यहीं पर घटीं। इस शहर की ख्याति मेरी भी ख्याति है। केरल के बाहर के लोगों तक साहित्य शहर कोषिक्कोड के साहित्यकारों का परिचय पहुँचाने के इरादे से मैंने इस किताब की रचना की। इस शहर की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में मेरा नाम भी शामिल है। कोषिक्कोड के वर्तमान साहित्यिक हालात के बारे में अगर मैं कहूँ कि यहाँ मौलिक और अनूदित साहित्यिक रचनाएँ सागर के लहरों की भाँति एक के बाद एक प्रकाशित होती रहती हैं, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। शहर का केंद्र 'मानांचिरा' से शुरू करके यहाँ आप साहित्यिक तीर्थयात्रा कर सकते हैं।' मानांचिरा' से सटकर सार्वजनिक पुस्तकालय और एस. एम. स्ट्रीट जो पहले स्वीट मीट की गली थी, ज्ञानपीठ विजेता एस. के. पोट्टेक्काट ने 'एक गली की कहानी' लिखकर इसे अमर बनाया। थोड़ी ही दूरी पर कोट्टारम रोड जहाँ पर एक और ज्ञानपीठ विजेता एम.टी. वासुदेवन नायर का भवन 'सितारा' जहाँ से इस शहर को इकानब्बे साल के बुजुर्ग लेखक का आशीर्वाद सतत मिलता रहता था। शहर में अनेक सांस्कृतिक केंद्र भी हैं, जहाँ पुस्तक विमोचन, लेखक चर्चा, संगोष्ठी या पुस्तक मेला आदि कोई-न-कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम रोजाना आयोजित होता रहता है। विस्तार के भय से मैंने इस किताब में केवल 31 साहित्यकारों को चुना है, जिन्हें साहित्य अकादेमी ने सम्मानित किया। ऐसी बात नहीं कि मेरे विचार में वही साहित्यकार श्रेष्ठ हैं जिसे अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। सैकड़ों लेखकों में से चुनाव करना मेरे लिए कठिन हो गया। इसलिए चुनाव के लिए ऐसा मापदंड रखना अनिवार्य हो गया। कोषिक्कोड को 'साहित्य शहर' का खिताब प्राप्त होनेवाली इस अपूर्व वेला में इस शहर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना अपना कर्तव्य मान कर मैंने यहाँ के साहित्यकारों का संक्षिप्त परिचय और उनकी एक रचना का अनुवाद शामिल करके प्रस्तुत किताब की रचना की है। कहानी, कविता, उपन्यास अंश, यात्रा संस्मरण, आत्मकथ्य, आत्मकथा अंश, साक्षात्कार आदि विधाओं की रचनाएँ इस किताब में शामिल हैं। साहित्य को रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न अंग बनानेवालों के इस शहर में सड़क के किनारे यात्रियों के इंतजार में पार्क किए गए वाहनों के ड्राइवरों को आप किताब पढ़ते देखेंगे। इस शहर ने आम जनता तक साहित्य का संस्कार पहुँचाया है। यहाँ की प्रकाशक संस्थाएँ और वाचनालयों ने लोगों की साहित्यिक रुचि को खाद देकर पनपाया। आँकड़े बताते हैं कि विश्व भर में कुल तीन सौ पचास साहित्य शहर हैं। सबसे पहले स्कॉटलैंड के एडिनबरो शहर को यह खिताब मिला। इस सूची में शामिल होने का सौभाग्य कोषिक्कोड को हाल में मिला। साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, पुस्तकप्रेमियों और पाठकों ने मिलकर इसे यह खिताब दिलवाया। साहित्य का मूल्य पहचाननेवाले लोग, साहित्यकारों का आदर करनेवाला समाज, सांस्कृतिक संगम, रेवती पट्टत्तानम जैसी विद्वत सभाएँ आदि कई बातों ने मिलकर कोषिक्कोड को इस पद के लिए योग्य बनाया। यह शहर 'बेपूर सुलतान' नाम से विश्वप्रसिद्ध बशीर की जन्मभूमि है। विश्व के अनेक शहरों में घूमकर लौटनेवाले एस. के. पोट्टेक्काट की जन्मभूमि है। इस शहर के साहित्यकारों की सूची बहुत लंबी है। खेद है कि मैं सबको शामिल नहीं कर पा रही हूँ। लेखकों का चुनाव करते समय मैंने उन साहित्यकारों को भी इस किताब में स्थान दिया है जो जन्म से कोषिक्कोड के अपने नहीं, लेकिन वे यहाँ के पाठकों के लिए अपनों से भी अधिक अपने हैं। उनके बिना कोषिक्कोड का सांस्कृतिक परिवेश अधूरा रह जाता। इस शहर को यह खिताब दिलाने में उन्होंने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस शहर से उनका कर्म और साहित्यिक जीवन अधिक जुड़ा है। यह शहर ही ऐसा है जिसने अपने मेहमानों को कभी निराश नहीं किया.
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