बीरेन्द्र परमार जन्मतिथि: 10 मार्च 1962 जन्म स्थान : ग्राम पोस्ट-जयमल डुमरी, जिला-मुजफ्फरपुर-843107 (बिहार) शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी) बी.एड., पी-एच.डी., कार्य एवं अनुभवः भारत सरकार के विभिन्न विभागों में अनेक पदों पर देश के विभिन नगरों में सेवा करने के बाद 2022 में सेवानिवृत्त सम्प्रति स्वतंत्र लेखन। पूर्वोत्तर भारत में पंद्रह वर्षों तक प्रवास तथा पूर्वोत्तर भारत के समाज, संस्कृति, लोकजीवन, लोक साहित्य और आदिवासी परंपरा पर विपुल लेखन। प्रकाशित पुस्तकें : 1. अरुणाचल का लोकजीवन 2. अरुणाचल के आदिवासी और उनका लोकसाहित्य 3. हिंदी सेवी संख्या कोश 4. राजभाषा विमर्श 5. कथाकार आचार्य शिवपूजन सहाय 6. हिंदी राजभाषा, जनभाषा, विचमाषा (संपा.) 7. पूर्वोत्तर भारत अतुल्य भारत 8. असम लोकजीवन और संस्कृति 9. मेघालय: लोकजीवन और संस्कृति 10. त्रिपुरा: लोकजीवन और संस्कृति 11. नागालैंड लोकजीवन और संस्कृति 12. पूर्वोत्तर भारत की नागा और कुकी-चीन जनजातियाँ 13. उत्तर-पूर्वी भारत के आदिवासी 14. पूर्वोत्तर भारत के पर्व-त्योहार 15. पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक आयाम 16. यतो अधर्मः ततो जयः (व्यंग्य संग्रह) 17. मणिपुर भारत का मणिमुकुट 18. उत्तर-पूर्वी भारत का लोक साहित्य 19. अरुणाचल प्रदेश लोकजीवन और संस्कृति 20. असम : आदिबासी और लोक साहित्य 21. मिजोरम आदिवासी और लोक साहित्य 22. पूर्वोत्तर भारत धर्म और संस्कृति 23. आदिवासी संस्कृति 24. अरुणाचल प्रदेश: अतीत से वर्तमान तक (संपा.) 25. समय होत बलवान (डायरी) 26. समय समर्थ गुरु (डायरी) 27. सिक्किम लोकजीवन और संस्कृति 28. फूलों का देश नीदरलैंड (यात्रा संस्मरण) 29. भष्ट्राचार अमर रहे (व्यंग्य संग्रह) 30. पूर्वोत्तर भारत भूमि और लोग 31. मिजोरम का लोकजीवन 32. दलाली का सुख (व्यंग्य उपन्यास) 33. आदिवासी साहित्य और जीवन मूल्य।
प्रस्तुत पुस्तक आम समीक्षात्मक पुस्तकों से भिन्न है। इसमें अनेक ऐसी पुस्तकों की समीक्षा की गई है जिनकी चर्चा हिंदी के मठाधीश आलोचक नहीं करते हैं। इस आलोचनात्मक पुस्तक में उपन्यास, कहानी संग्रह, कविता संग्रह, इतिहास, गीत संग्रह, कथेतर साहित्य सभी प्रकार की पुस्तकें शामिल हैं। पुस्तक में कुछ ऐसे साहित्यकारों पर केंद्रित आलेख हैं जो तथाकथित बड़े समीक्षकों व आलोचकों की आँखों से ओझल रहते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी मेधावी लेखनी से अक्षरों का विपुल संसार सृजित किया है और कालजयी रचनाओं से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। यह पुस्तक पाठकों को ज्ञान के एक नए क्षितिज से साक्षात्कार कराती है।
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