प्रस्तावना
प्रस्तावना किसी पुस्तक की जान होती है जिसे संक्षिप्त में पढ़कर पाठक सम्पूर्ण पुस्तक के सारांश को समझ जाता है। इसीलिये मैं अपनी पुस्तक की प्रस्तावना प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरी पुस्तक 'सरकार (भ्रष्टाचार) और क्रान्ति की प्रस्तावना प्रमुख तीन भागों में विभक्त है।
1. सरकार, जिसमें 63 वर्ष की स्वतंत्रता के बाद जिक्र पढ़ने को मिलेगा।
2. भ्रष्टाचार, जिसमें सरकार द्वारा किये बड़े-बड़े घोटालों का जिक्र होगा।
3. क्रान्ति-इसमें सन् 2012 से 2029 तक देश में होने वाली क्रान्ति (सामाजिक परिवर्तन) के बारे में वर्णन होगा। क्रान्ति पुस्तक का एक महत्वपूर्ण भाग है। जिसको पाठक पढ़कर आश्चर्यजनक भ्रान्ति में डूब जायेगा और सोचने को इतना मजबूर हो जायेगा कि क्या लोकतंत्र भारत में ऐसा संभव होगा। मेरा उद्देश्य किसी पार्टी या राजनेता के खिलाफ व्याख्यान देना नहीं है। परन्तु उनको ऐसा लगे तो मुझे क्षमा जरूर करें। मेरा उद्देश्य देश की 63 वर्ष आजादी का विश्लेषण करना है। राजनीति करना एक अलग पहलू है और राजनीति विश्लेषण करना, राजनीति करने से अत्यन्त महत्वपर्ण पहलू है जो राजनीति करने वालों से बिल्कुल अलग होता है। क्योंकि राजनीति एक राष्ट्र सेवा है कोई शौक नहीं। राजनीति विश्लेषण राजनीति करने वाली सरकार की नीतियों का अवलोकन है। मैं अपनी पुस्तक के जरिये जनता के सामने लिखित रूप में जा रहा हूँ। भले ही कुछ लोगों को मेरे विचार अच्छे (सहमत) न लगें। परन्तु जो राष्ट्रवादी, विकासवादी, बुद्धिजीवी मीडिया राजनीतिक विश्लेषण करने वाले एवं समाज सेवी मेरे विचारों से जरूर सहमत होंगे। यदि वे भी नहीं होंगे तो इतना मैं जरूर कहता हूँ कि एक चर्चा का विषय बनकर अवश्य रहेगा जो मैं पुस्तक में लिख रहा हूँ।
1. सरकार सबसे बेहतरीन सरकार वह होती है जो कम समय शासन करे और जनता के अधिकारों, माँगों को ध्यान में लाकर उनका समाधान करे। अच्छी सरकार की पहचान उसके कार्यों से होती है। जो अपने नागरिकों को प्रदान करती है। झूठे वायदे, खोखले घोषणा-पत्रों की दुहाई देने वाली सरकार कभी जनता की हितैषी नहीं होती है। सरकार का कार्य राष्ट्र की ओर ध्यान देना ही नहीं बल्कि अपने नागरिकों की रक्षा करने के साथ-साथ विदेशी ताकतों के खिलाफ निपटने की जिम्मेदारी होती है। क्योंकि राष्ट्र एक सर्वोच्च अंग होता है। राष्ट्र से बड़ा कोई नहीं हो सकता क्योंकि राष्ट्र में सभी निवास करते हैं और निवास करने वाली जनता पर सरकार शासन करती है।
सरकार राष्ट्र व जनता के बीच की कड़ी होती है। जो एक अत्यन्त महत्वूपर्ण कड़ी कहलाती है। यदि यहीं-कहीं गलत कार्य करने लगे तो राष्ट्र खतरे में पड़ जाता है। राष्ट्र खतरे में पड़ने का अर्थ होता है। जनता के अधिकारों का हनन । परन्तु आज 63 वर्षों की राजनीति का अध्ययन किया जाये और विश्लेषण करके देखा जाये तो भारत में जितनी सरकारें बनी सभी विफल दिखाई देती नज़र आने लगती है। जैसे-भ्रष्टाचार, धन-लूट, कृषक आत्मदाह, आतंकवाद जैसी समस्या मुँह खोले हुए खड़ी है। ऐसे अनेक तत्व हैं जिनका अध्ययन आगे इसी पुस्तक में कर सकेंगे। पढ़ने के बाद आप हैरान जरूर होगें कि आज़ाद होने के बाद देश के राजनेता एक ऐसी घिनौनी हरकते करते हुए देश के साथ विश्वासघात कर बैठेंगे। सरकार के लोगों में सबसे बड़ी कमियाँ अशिक्षा का होना है। यह बात अलग है कि संविधान में मंत्रिमण्डल के लिये कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है। हमें यह बात नहीं भूलना चाहिये कि उस समय परिस्तिथियाँ कुछ और थीं अब परिस्तिथियाँ बदल चुकी हैं। शिक्षा का प्रसार प्रचार बढ़ चुका है। प्रत्येक नागरिक शिक्षा ग्रहण कर रहा है। मंत्रियों की शिक्षा निर्धारित करना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। क्योंकि कानून का ज्ञान होना सरकार में बैठने के लिये अनिवार्य अंग होता है। मेरा विचार जहाँ तक है कि 'अशिक्षित मंत्रिमण्डल विवेकहीन अज्ञानियों की सरकार है। हंम इसी निष्कर्ष पर जा पहुँचते हैं कि 'बिना कानूनों के ज्ञान से बनी सरकार मूर्यों का एक मेला है।' मैं कहता हूँ-जिस देश के राजनेता भ्रष्ट, चोर, ठग, स्वार्थी एवं अय्याश हो जाते हैं तो उस राष्ट्र के विकास को रोककर उस राष्ट्र के पतन का मार्ग प्रशस्त करते हैं और विदेशी ताकतें प्रत्यक्ष रूप से लाभ न उठाकर अप्रत्यक्ष रूप से उस राष्ट्र की जड़ों को कमजोर करने लग जाती है। अन्त में वह राष्ट्र इतना कमजोर बन जाता है जिस पर विदेशी हुकूमतें कायम हो जाती हैं।' आज देश को स्वतंत्रता मिले 63 वर्ष बीत चुके हैं परन्तु देश का नागरिक स्वतंत्रता का दावा तो कर सकता है
लेखक परिचय
डालचन्द्र सिंह जन्म-05 मार्च 1972, ग्राम-बुर्ज तुला, अकोस-मथुरा माता - श्रीमती पातुरा देवी पिता - श्री सुनहरी लाल पत्नी- श्रीमती सरोज देवी शिक्षा- डॉ० बी०आर० अम्बेडकर वि० वि० आगरा से एम०ए० (राजनीति शास्त्र) तथा महाराष्ट्र सरकार से आर्ड० जी० डी० प्रकाशन-सौगन्ध एवं महाबंजर (एकांकी संग्रह) सम्प्रति - प्रधानाचार्य, किसान इण्टर कॉलेज काँधी, कानपुर देहात
Hindu (हिंदू धर्म) (13872)
Tantra (तन्त्र) (1020)
Vedas (वेद) (738)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2117)
Chaukhamba | चौखंबा (3484)
Jyotish (ज्योतिष) (1618)
Yoga (योग) (1179)
Ramayana (रामायण) (1320)
Gita Press (गीता प्रेस) (720)
Sahitya (साहित्य) (25014)
History (इतिहास) (9180)
Philosophy (दर्शन) (3661)
Santvani (सन्त वाणी) (2600)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist