लेखक परिचय
श्री प्रकाश चन्द्र पांडे का जन्म अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) में जनवरी 1, 1932 को हुआ। प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल से प्राप्त कर लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.एससी. तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1954 में एम.ए. किया। बिड़ला आर्ट्स कॉलेज, पिलानी से अध्यापन कार्य प्रारंभ कर राजस्थान के ही करौली तथा टोंक के महाविद्यालयों में शिक्षक रहे। सेवा निवृत्ति के बाद सम्पूर्ण साक्षरता अभियान में सक्रिय हो गए। समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में लिखते भी रहे। सन 2009 में 'पहाड़ों से मैदान तक' शीर्षक की पुस्तक में अपने जीवन का संक्षिप्त परिचय तथा भारत के सन 1940 के बाद हुए बदलते स्वरूप का मूल्यांकन भी किया है।
पुस्तक परिचय
इस पुस्तक में इतिहास के दर्शन, प्रमुख धर्मों के इतिहास, इतिहासलेखन तथा इतिहासबोध का संक्षिप्त वर्णन है। विश्व के विभिन्न धर्मों तथा मानव समाज द्वारा अर्जित ज्ञान और विज्ञान ने मानव-इतिहास को प्रभावित किया है। अतएव इतिहासलेखन में इन विषयों का मूल्यांकन भी किया जाना प्रासंगिक है। कुछ लोग आधुनिक उदारवादी ज्ञान और शिक्षा, वैज्ञानिक मिज़ाज तथा मानवतावादी सोच को अभी भी बेहतर समाज और इतिहास के नवनिर्माण की आवश्यक शर्त नहीं मान सके हैं। लेखक का विचार है कि इतिहासकार को भी स्वयं अपने इतिहासबोध को परखते रहना चाहिए, आधुनिक काल के कुछ प्रमुख भारतीय विचारकों के इतिहासबोध की संक्षिप्त समीक्षा भी इस पुस्तक में की गई है।
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