डॉ. हरिवल्लभ भायाणी देश के जानेमाने विद्वानों में से एक हैं। भारतीय विद्याभवन बम्बई, गुजरात युनिवर्सिटी और एल. डी. इन्स्टिट्युट ऑफ इंडोलोजी, अहमदाबाद में प्रोफेसर के रूप में रहकर उन्होंने प्राचीन भारतीय भाषाओं, भाषाशास्त्र, साहित्य और लोकसाहित्य के क्षेत्र में जो प्रदान किया है, वह सुविदित है। गुजराती तथा संस्कृत साहित्य की सेवाओं के लिए वे दिल्ली की साहित्य अकादमी तथा राष्ट्रपति के द्वारा भी सम्मानित हो चुके हैं।
डॉ. भायाणीने अपभ्रंश, पुरानी हिन्दी और राजस्थानी पर भी विपुल शोधकार्य किया है। यद्यपि उनके अधिकांश शोधलेख अंग्रेजी तथा गुजराती में हैं, तथापि उन्होंने समय-समय पर हिन्दी में भी काफी शोध-लेख लिखें हैं। उनके हिन्दी लेखों में से कुछ चुने हुए लेखों को प्रकाशित करते हुए हिन्दी साहित्य अकादमी गौरव का अनुभव करती है।
संकलित लेखों में अपभ्रंश, अर्धमागधी, प्राचीन गुर्जर भाषा, प्रचीन राजस्थानी, प्राचीन हिन्दी, प्राचीन पंजाबी और लोकसाहित्य से संबंधित महत्त्वपूर्ण लेख हैं। इनमें से कुछ हिन्दी की वरिष्ठ पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुए हैं। आशा है, इन लेखों से हिन्दी साहित्य के अध्येता और अनुसंधित्सु अवश्य लाभान्वित होंगे ।
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