लेखक परिचय
डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव जन्म - 20 दिसम्बर 1946, मध्यप्रदेश । शिक्षा - एम. ए. (संस्कृत) सागर विश्वविद्यालय, 1967. एम. ए. (संगीत) इ.क.सं. विश्वविद्यालय, खैरागढ़, 2004. संगीतशास्त्र, 2007. सामुद्रिकशास्त्र, 2019. पी.एच.डी. संस्कृत, विषय डी. लिट्. संस्कृत, विषय रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर. गुञ्जन कलासदन, जबलपुर द्वारा 2011 में सरस्वती अलङ्करण, कादम्बरी, जबलपुर द्वारा 2012 में संगीतशास्त्र तथा 2016 में बहुआयामी हिन्दी सेवाओं के लिये पुरस्कृत किया गया। कहानी संग्रह 'जिजीविषा' पर 2014 में म.प्र. लेखिका संघ, भोपाल द्वारा पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रकाशित ग्रन्य - 1. संगीताधिराज हृदयनारायण देव हृदयकौतुकम् हृदयप्रकाशः। 2008 2. कालिदास-साहित्य एवं कामकला नायकनायिकानखशिखनिरूपण । 2014 3. कहानी संग्रह जिजीविषा 2014, 4. कहानी संग्रह सरेराह 2015 5. सामुकद्रिशास्त्र के आलोक में कालिदास, 2021 कतिपय संस्कृत एवं हिन्दी ग्रन्थों का सम्पादन। आजीवन गृहिणीधर्म का निर्वहन करते हुए अध्ययन एवं शोधकार्य में संलग्न डॉ. सुमनलता जी के संस्कृत, संगीत एवं इतिहास की विविध संगोष्ठियों में अब तक पैंतालीस शोधपत्र प्रस्तुत हो चुके हैं; जिनमें से कुछ स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुए हैं। संस्कृत वाङ्मय में चतुष्यष्टि कलाओं पर किया गया कार्य उल्लेखनीय है। साहित्य में रुचि के साथ आपको रवीन्द्रसंगीत, नृत्य, नाटक, हस्तकला, गृहोद्यान एवं समाजसेवा में भी अभिरुचि है। मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धि है कि डॉ. सुमनलता के शोधकार्य के बाद 'संगीत संकल्प', 'गोंडी पब्लिक ट्रस्ट' संस्थाओं एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से मंडला के रामनगर किले में विस्मृत संगीतशास्त्री राजा हृदयशाह की स्मृति में 'हृदयशाह समारोह' का शुभारम्भ हुआ, जो अब 'आदि उत्सव' के रूप में मनाया जाता है।
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