पुस्तक परिचय
'तनाव-प्रबन्धन' अपने आपमें एक नया विषय है। संसार में जब कोई समस्या या मुसीबत अपने पैर पसारने लगती है तो उस समस्या से मुक्ति या छुटकारा पाने के प्रयास भी सक्रिय होने लगते हैं। तनाव आदमी की अपनी कोई निजी या व्यक्तिगत चीज नहीं है, जो उसके भीतर से निकल नहीं सकती। यह एक बाहरी चीज है जो नकारात्मक सोच और व्यर्थ चिंतन के जरिए आदमी के दिलो-दिमाग में घर कर जाती है। तनाव किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि यह दुनिया के सब लोगों की समस्या है, इसलिए हम सबको मिल-जुलकर इस महा-समस्या को दूर करने या मिटाने का सार्थक उपाय करना चाहिए। इस महान कार्य के लिए आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भावना, एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान, दयाभावना, क्षमाभाव, सरलता, सच्चाई, ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठता की महती आवश्यकता है। इसके साथ ही आपसी कलह, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, अहंकार, घृणाभाव तथा बैर भाव आदि दुर्गुणों का भी हमें त्याग करना होगा। तभी हम सभी पूर्णतः तनावमुक्त होकर स्वस्थ, शान्तिपूर्ण और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
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