सार्वभौम संस्कृत प्रचार संस्थान, वाराणसी के संस्थापक आचार्य वासुदेव द्विवेदी शास्त्री जी द्वारा प्रणीत प्रारम्भिक वाक्य संग्रह, सुगमशब्दरूपावली. सुगमधातुरूपावली, ललित मंगलम् और संस्कृत गान माला का समग्र रूप जो प्रारम्भिक संस्कृत छात्र से लेकर अध्यापकों की सम्भाषण सम्बन्धित जिज्ञासा का प्रायः शमन करने वाला ग्रन्थ है। बाल मनोविज्ञान को केन्द्र में रखकर एक ऐसा ग्रन्थ जो एक ही शब्दरूपों के सदृश अन्य शब्दरूपों का संग्रह, धातुओं में एक समान चलने वाले तथा थोड़ी सी भिन्नता वाले धातुओं का विशेष दिग्दर्शन, दशगण में विभक्त धातुओं में विकरण सहित प्रस्तुति, सन्नन्त, यडन्त, यङ्लुगन्त आदि धातुओं का संग्रह, लिडादि लकारों का स्वरूप ज्ञान, अनुष्टुप् से लेकर दण्डकादि वृत्तों का स्वरूप, लक्षण, उदाहरण सहित संस्कृत हिन्दी कविता के विभिन्न विधाओं का परिचय, परिशिष्ट भाग में कुछ ऐसे शब्दरूपों का संग्रह जो थोड़े भिन्न से हों, आधुनिक व्यावहारिक कोशादि के माध्यम से संस्कृत का सम्यक् परिज्ञान कराना ही इस ग्रन्थ की विशेषता है।
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