य ह पुस्तक पूर्णतः और एकमात्र वाल्मीकि रामायण पर आधारित है।
इस पुस्तक का उद्देश रामायण के विषय में समाज में फैली मिथ्या धारणाओं का वाल्मीकि रामायण के आधार पर निवारण करना है। चूंकि वर्तमान में उपलब्ध समस्त रामायणों में वाल्मीकि रामायण को ही प्रमाणिक माना जाता है तो उसी को आधार बनाकर इस पुस्तक की रचना की गई है।
इस पुस्तक में तर्को के माध्यम से विषय को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। यह प्रयास कितना सफल रहा इसका निर्णय तो सुधि पाठक ही करेंगे।
यहाँ यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि तर्कों का उत्तर देने का प्रयास लेखक की ओर से किया गया है किंतु कुतर्कों के उत्तर के लिए लेखक क्षमाप्रार्थी है।
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