जीवन के विविध आयामों को स्पर्श करती कविताओं का यह संकलन मन को कुरेदने वाला है। राष्ट्र के लिए सर्वस्व बलिदान करने को तत्पर एक सैन्य हृदय के भाव, कलम की स्याही बनकर मानो कागज के मैदान पर युद्ध लड़ रहें हों। प्रायः लघुकाय परंतु भावनाओं का सागर समेटे ये कविताएँ कहीं फूल की तरह सुगंध बिखेरती तो कहीं काँटे की तरह कठोर होकर चुभने लगती हैं। सैन्य धर्म, मातृ-पितृ-भक्ति, पत्नी-प्रेम, भगवद्भक्ति, राष्ट्रभक्ति, मानव-प्रेम और विश्वबन्धुत्व आदि कई नदियों का संगम होकर यह संकलन जैसे कुंभ से अमृत की तरह छलक रहा हो। मौलिक रूप से इन कविताओं का विषय स्थूल घटनाओं का उद्बोधन न होकर उन शाश्वत मानवीय भावनाओं का हिलोर है, जिससे शब्दों की नौका जूझने का साहस जुटा रही है। कहीं दूर पहाड़ों के ऊपर जहाँ आसमान में तारे साफ़ चमक रहे हों, गोली और बम के धमाकों की प्रतीक्षा में हृदय की धड़कन साफ़ सुनी जा सकती हो, कलम ने भी अपना प्रवाह निर्बाध ही रखा और शब्द ऐसे जुड़े जैसे आकाश के नक्षत्र।"
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