बोरा श्रृंखला की प्रथम पुस्तक है। एक युद्ध जिससे तीनों लोकों में राक्षसों ने यह बारा आधिपत्य जमा लिया था। कई देवता राक्षसों से बदला लेने के लिए छुप गए थे; पृथ्वी पर राजा विक्रम सेन का आधिपत्य समाप्त हो चुका था। रानी पद्मा के बलिदान से उनके दोनों जुड़वा बच्चे जीवित तो थे पर एक दूसरे से बिछड़ चुके थे।
देवताओं का एक गण छुपने के लिये उन दोनों बालकों में से एक को चुनता है और वहीं फँस जाता है। एक बालक लापता हो जाता है, और दूसरा भेड़ियों के साथ अपना जीवन जीते हुए इंसानों को दुश्मन समझकर लड़ता है। फिर उन्हीं इंसानों से उसे एक नाम मिलता है: 'बोरा'। बोरा अपने भेड़िया पिता की मौत का बदला लेने के लिए तथा उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए इंसानों से दोस्ती कर दैत्यों से युद्ध की तैयारी करता है। वह किस प्रकार धीरे-धीरे इस दुनिया से सीखकर विश्वरक्षक के रूप में उभरता है, जानने के लिये अवश्य पढ़ें 'बोरा श्रृंखला' का प्रथम खंड।
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