पुस्तक परिचय
भारत में सौन्दर्यशास्त्र का अभिधान अधिक प्राचीन नहीं है, तो भी सौन्दर्यशास्त्र का विवेचन-विश्लेषण न्यूनाधिक रूप में वैदिक साहित्य, संस्कृत साहित्य, भारतीय दर्शन तथा काव्यशास्त्र में विभिन्न पर्यायों के रूप में दृष्टिगोचर होता है। सौन्दर्यशास्त्र के क्षेत्र में सौन्दर्य की शताधिक परिभाषाएँ प्रचलित हैं, किन्तु कला के सन्दर्भ में सौन्दर्य कृति का वह समन्वित प्रभाव है, जो पाठक, द्रष्टा अथवा सामाजिक को आह्लादित करता है। सौन्दर्यशास्त्र मुख्यतः ललित कलाओं का ही क्षेत्र है। फिर भी, इसका प्रकृति, मानव, दर्शन और विज्ञान से भी न्यूनाधिक सम्बन्ध परिलक्षित होता है। सौन्दर्यशास्त्र के अन्तर्गत कला-सौन्दर्य का ही नहीं प्रत्युत उसके विभिन्न तत्त्वों, वर्गों एवं पक्षों आदि का भी विवेचन किया जाता है। सौन्दर्यशास्त्र में कला की सूजन प्रक्रिया से लेकर आस्वादन प्रक्रिया की सभी क्रिया-प्रक्रियाओं की विवेचना की जाती है। सौन्दर्यशास्त्र के चार आधारभूत तत्त्व हैं-कल्पना, उदात्त, बिम्ब और प्रतीक। इन चारों मूलाधारों के अभाव में सौन्दर्यशास्त्र का अध्ययन सम्भव प्रतीत नहीं होता। प्रस्तुत पुस्तक 'सौन्दर्यशास्त्र : विविध आयाम' के अन्तर्गत सौन्दर्यशास्त्र के विभिन्न बिन्दुओं की ओर अध्येताओं का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया है। यह पुस्तक सौन्दर्यशास्त्र को समझने और परखने के लिए सर्वथा उपयुक्त सिद्ध होगी, ऐसा विश्वास है।
लेखक परिचय
जन्म : 1 अप्रैल, सन् 1962 । शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी) प्रथम श्रेणी, एम. फिल. (प्रथम श्रेणी: विशेष योग्यता सहित), पी-एच.डी.। विशिष्ट सम्मान : एम.ए. (हिन्दी) में सर्वप्रथम रहने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र की ओर से 'स्वर्ण पदक' द्वारा सम्मानित । अभिरुचि: समीक्षा, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियाँ, कविता, अध्ययन-अध्यापन और शोध के क्षेत्र में विशेष अभिरुचि। प्रख्यात सामाजिक एवं राष्ट्रीय संस्था 'भारत विकास परिषद्' का वर्तमान में क्षेत्रीय मंत्री का दायित्व । प्रकाशन और विविध लेखन : नगर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में अनेक कहानी, कविता, व्यंग्य और आलेखों का प्रकाशन। सौन्दर्यशास्त्र : विविध आयाम। शीघ्र प्रकाश्य ग्रंथ : रीतिकालीन आचार्य कवि ग्वाल का वीर काव्य, साठोत्तरी हिन्दी कविता में सांस्कृतिक चेतना । अध्यापन अनुभव : डी.ए.वी. कॉलेज, साढ़ौरा (यमुनानगर) में 33 वर्षों का व्यापक अध्यापन अनुभव। यहीं से एसोसिएट प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में 31 मार्च, 2022 को सम्मान सहित सेवानिवृत्ति । संप्रति : स्वतंत्र अध्ययन एवं लेखन । सम्पर्क सूत्र : 950, वार्ड न. 13, शहीद उधम सिंह कॉलोनी, शाहाबाद मारकंडा (कुरुक्षेत्र) हरियाणा। मोबाइल : 94162-49938
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